Summary — Konkani
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The Konkani meaning of each verse is shown below the verse.
রাজা দশরথো হৃষ্ট স্সুমন্ত্রমিদমব্রবীত্ ॥ 1 ॥
rājā daśaratho hṛṣṭa ssumantramidamabravīt || 1 ||
मागीर रात थरल्या उपरांत, राजा दशरथ आपल्या गुरूंकडेन आनी सगळ्या बांदवांकडेन एकठांय जावन आनंदान सुमंत्राक हें उलयलो. AI
ব্রজন্ত্বগ্রে সুবিহিতা নানারত্নসমন্বিতাঃ ॥ 2 ॥
vrajantvagre suvihitā nānāratnasamanvitāḥ || 2 ||
आयज सगळे खजिनदार भरपूर द्रव्य घेवन, नाना रत्नांनी सजिल्ले आनी बरो नेमान वेवस्थीत जावन मुखार वचात. AI
মমজ্ঞাসমকালং চ যানযুগ্যমনুত্তমম্ ॥ 3 ॥
mamajñāsamakālaṃ ca yānayugyamanuttamam || 3 ||
चतुरंग सेनाय तशेंच म्हज्या आज्ञेच्या वेळार उत्तम अशा यान-युग्यांसयत सगळीकडेन वेगान भायर सरची. AI
মার্কণ্ডেযশ্চ দীর্ঘাযুঃঋষিঃ কাত্যাযনস্তথা ॥ 4 ॥
mārkaṇḍeyaśca dīrghāyuḥṛṣiḥ kātyāyanastathā || 4 ||
वसिष्ठ, वामदेव, जाबाली, काश्यप, दीर्घायु मार्कंडेय ऋषी आनी तशेंच कात्यायन हे द्विज. AI
যথা কালাত্যযো ন স্যা দ্দূতা হি ত্বরযন্তি মাম্ ॥ 5 ॥
yathā kālātyayo na syā ddūtā hi tvarayanti mām || 5 ||
हे द्विज मुखार वचात; म्हजो रथ जोड; काळाचो अतिक्रम जावंक ना जावं म्हणून, दूत म्हाका गडबडायतात. AI
রাজানমৃষিভি স্সার্ধং ব্রজন্তং পৃষ্ঠতোঽন্বগাত্ ॥ 6 ॥
rājānamṛṣibhi ssārdhaṃ vrajantaṃ pṛṣṭhato'nvagāt || 6 ||
राजाच्या वचनाप्रमाणें ती चतुरंगिणी सेना ऋषींसयत वचपी राजाच्या फाटल्यान गेली. AI
রাজা তু জনক শ্শ্রীমান্ শ্শ্রুত্বা পূজামকল্পযত্ ॥ 7 ॥
rājā tu janaka śśrīmān śśrutvā pūjāmakalpayat || 7 ||
चार दिसांचो मार्ग काडून तो विदेह देशांत पावलो; श्रीमान जनक राजान ती खबर आयकून पूजेची तयारी केली. AI
জনকো মুদিতো রাজা হর্ষং চ পরমং যযৌ ॥ 8 ॥
janako mudito rājā harṣaṃ ca paramaṃ yayau || 8 ||
उपरांत वृद्ध राजा दशरथाकडेन पावन, राजा जनक आनंदीत जावन परम हर्षाक पावलो. AI
স্বাগতং তে মহারাজ দিষ্ট্যা প্রাপ্তোঽসি রাঘব ॥ 9 ॥
svāgataṃ te mahārāja diṣṭyā prāpto'si rāghava || 9 ||
आनी तो नरश्रेष्ठ (जनक) आनंदान भरिल्लो नरश्रेष्ठ दशरथाकडे अशें म्हणालो: हे महाराजा, तुका स्वागत आसूं; हे राघवा, दैवाच्या कृपेन तूं हांगा पावलाय. AI
দিষ্ট্যা প্রাপ্তো মহাতেজা বসিষ্ঠো ভগবানৃষিঃ ॥ 10 ॥
diṣṭyā prāpto mahātejā vasiṣṭho bhagavānṛṣiḥ || 10 ||
तुज्या दोनूय पुत्रांची पराक्रमान जिखल्ली अशी प्रीती तूं मेळयतलो. दैवाच्या कृपेन महातेजस्वी भगवान वसिष्ठ ऋषि हांगा पावले. AI
দিষ্ট্যা মে নির্জিতা বিঘ্না দিষ্ট্যা মে পূজিতং কুলম্ ॥ 11 ॥
diṣṭyā me nirjitā vighnā diṣṭyā me pūjitaṃ kulam || 11 ||
सगळ्या द्विजश्रेष्ठां वांगडा, देवां वांगडा शतक्रतू (इंद्र) जशे आसता तशे; दैवाच्या कृपेन म्हजे विघ्न नश्ट जाले, दैवाच्या कृपेन म्हजें कुळ पूजीत जालें. AI
শ্বঃ প্রভাতে নরেন্দ্রেন্দ্র নির্বর্তযিতুমর্হসি ॥ 12 ॥
śvaḥ prabhāte narendrendra nirvartayitumarhasi || 12 ||
हे नरेंद्रेंद्रा, वीर्यश्रेष्ठ आनी महात्मा अशा राघवां वांगडा सम्बंध जावपाचें कार्य फाल्यां सकाळीं तुवें पूर्ण करपाक जाय. AI
তস্য তদ্বচনং শ্রুত্বা ঋষিমধ্যে নরাধিপঃ ॥ 13 ॥
tasya tadvacanaṃ śrutvā ṛṣimadhye narādhipaḥ || 13 ||
हे नरश्रेष्ठा, यज्ञाच्या अंतार ऋषींनी मान्य केल्लो विवाह जावो. ताचें तें वचन आयकून ऋषींच्या मदीं नराधिप (दशरथ)... AI
প্রতিগ্রহো দাতৃবশ শ্শ্রৃতমেতন্মযা পুরা ॥ 14 ॥
pratigraho dātṛvaśa śśrṛtametanmayā purā || 14 ||
...वाक्यविदांमदीं श्रेष्ठ असो तो महीपतीकडे परत अशें म्हणालो: प्रतिग्रह दात्याच्या वश आसता; हें म्हजें पयलींच आयकलां. AI
ধর্মিষ্ঠং চ যশস্যং চ বচনং সত্যবাদিনঃ ॥ 15 ॥
dharmiṣṭhaṃ ca yaśasyaṃ ca vacanaṃ satyavādinaḥ || 15 ||
हे धर्मज्ञा, तूं जशें सांगतलो तशें आमी करतलों; सत्यवादी मनशाचें तें वचन धर्मिष्ठ आनी यशस्वी आसता. AI
তত স্সর্বে মুনিগণাঃ পরস্পরসমাগমে ॥ 16 ॥
tata ssarve munigaṇāḥ parasparasamāgame || 16 ||
हें आयकून विदेहाधिपती (जनक) परम विस्मयाक पावलो. उपरांत सगळे मुनीगण परस्पर एकठांय जाले. AI
রাজা চ রাঘবৌ পুত্রৌ নিশাম্য পরিহর্ষিতঃ ॥ 17 ॥
rājā ca rāghavau putrau niśāmya pariharṣitaḥ || 17 ||
मोठ्या आनंदान भरलेलीं तीं ती रात सुखान पसून गेलीं. राजान त्या दोन राघव पुत्रांक पळोवन खूब आनंदीत जालो. AI
জনকোঽপি মহাতেজাঃ ক্রিযাং ধর্মেণ তত্ত্ববিত্ ॥ 18 ॥
janako'pi mahātejāḥ kriyāṃ dharmeṇa tattvavit || 18 ||
तो परम प्रसन्न जावन जनकान बरो गोमांचो केल्लो, थंय रावलो. तसोच महातेजस्वी, धर्माचें तत्व जाणपी जनकूय धर्माप्रमाणें तीं क्रिया (विवाहाचीं कर्मां) करूंक लागलो. AI