మాయా పఞ్చకం

Maya Panchakam

✍️ Unknown author 📂 Panchakam & Pancharatnam 🖋️ Telugu script 🔢 5 verses 30 views
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⚠️ AI-generated translation — the Hindi meaning was produced by AI and automatically cross-checked against the Sanskrit, but it may still contain errors. It has not yet been reviewed by a scholar. Please refer to a traditional commentary for study.
Summary — Hindi
माया पञ्चकं में पाँच श्लोकों द्वारा माया की चतुराई का वर्णन किया गया है, जो अघटित को घटा देने में अत्यंत निपुण है। यह माया अद्वितीय, नित्य, अंशरहित और अखंड चित्स्वरूप में जगत्, ईश्वर और जीव का भेद उत्पन्न कर देती है। यह श्रुतियों और वेदांत के ज्ञाता विद्वानों को भी धन के दिखावे से कलुषित कर देती है और सुखचित्स्वरूप को शरीर से जोड़कर संसार-सागर में भ्रमण कराती है। यह गुण, वर्ण और जाति के भेद मिटे हुए स्वरूप में ब्राह्मण, वैश्य आदि का अहंकार तथा पुत्र, स्त्री और घर का मोह जगा देती है। अंत में यह अखंड में भी ब्रह्मा, विष्णु और शिव का भेद रचकर विद्वानों को भ्रमित कर देती है और हरि तथा हर के भेद-भाव को उत्पन्न कर देती है।

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The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.

Meaning —
Verse 1
నిరుపమనిత్యనిరంశకేఽప్యఖణ్డే –
మయి చితి సర్వవికల్పనాదిశూన్యే ।
ఘటయతి జగదీశజీవభేదం –
త్వఘటితఘటనాపటీయసీ మాయా ॥ 1 ॥
nirupamanityaniraṃśake'pyakhaṇḍe –
mayi citi sarvavikalpanādiśūnye |
ghaṭayati jagadīśajīvabhedaṃ –
tvaghaṭitaghaṭanāpaṭīyasī māyā || 1 ||

जो अद्वितीय, नित्य और अंशरहित है, जो अखंड चित्स्वरूप है, जो समस्त विकल्पों और कल्पनाओं से शून्य है — ऐसे मुझ चैतन्य में भी जगत्, ईश्वर और जीव का भेद उत्पन्न कर देती है वह अघटित को घटा देने में अत्यंत चतुर माया ॥ 1 ॥ AI

Verse 2
శ్రుతిశతనిగమాన్తశోధకాన-
ప్యహహ ధనాదినిదర్శనేన సద్యః ।
కలుషయతి చతుష్పదాద్యభిన్నా-
నఘటితఘటనాపటీయసీ మాయా ॥ 2 ॥
śrutiśatanigamāntaśodhakāna-
pyahaha dhanādinidarśanena sadyaḥ |
kaluṣayati catuṣpadādyabhinnā-
naghaṭitaghaṭanāpaṭīyasī māyā || 2 ||

सैकड़ों श्रुतियों और वेदांत के निर्णय को जानने वाले विद्वानों को भी अहो! धन आदि के दिखावे से तुरंत कलुषित कर देती है, और पशु आदि से अभिन्न कर देती है — वह अघटित को घटा देने में अत्यंत चतुर माया ॥ 2 ॥ AI

Verse 3
సుఖచిదఖణ్డవిబోధమద్వితీయం –
వియదనలాదివినిర్మితే నియోజ్య ।
భ్రమయతి భవసాగరే నితాన్తం –
త్వఘటితఘటనాపటీయసీ మాయా ॥ 3 ॥
sukhacidakhaṇḍavibodhamadvitīyaṃ –
viyadanalādivinirmite niyojya |
bhramayati bhavasāgare nitāntaṃ –
tvaghaṭitaghaṭanāpaṭīyasī māyā || 3 ||

जो सुखस्वरूप, चेतन, अखंड, विशुद्ध बोध और अद्वितीय है, उसे आकाश, अग्नि आदि से निर्मित शरीर में जोड़कर संसार-सागर में पूरी तरह भ्रमण कराती है — वह अघटित को घटा देने में अत्यंत चतुर माया ॥ 3 ॥ AI

Verse 4
అపగతగుణవర్ణజాతిభేదే –
సుఖచితి విప్రవిడాద్యహఙ్కృతిం చ ।
స్ఫుటయతి సుతదారగేహమోహం –
త్వఘటితఘటనాపటీయసీ మాయా ॥ 4 ॥
apagataguṇavarṇajātibhede –
sukhaciti vipraviḍādyahaṅkṛtiṃ ca |
sphuṭayati sutadāragehamohaṃ –
tvaghaṭitaghaṭanāpaṭīyasī māyā || 4 ||

जिसमें गुण, वर्ण और जाति का भेद मिट गया है, ऐसे सुखचित्स्वरूप में ब्राह्मण, वैश्य आदि का अहंकार उत्पन्न कर देती है, और पुत्र, स्त्री तथा घर के मोह को स्पष्ट रूप से जगा देती है — वह अघटित को घटा देने में अत्यंत चतुर माया ॥ 4 ॥ AI

Verse 5
విధిహరిహరవిభేదమప్యఖణ్డే –
బత విరచయ్య బుధానపి ప్రకామమ్ ।
భ్రమయతి హరిహరభేదభావా-
నఘటితఘటనాపటీయసీ మాయా ॥ 5 ॥
vidhihariharavibhedamapyakhaṇḍe –
bata viracayya budhānapi prakāmam |
bhramayati hariharabhedabhāvā-
naghaṭitaghaṭanāpaṭīyasī māyā || 5 ||

जो अखंड है, उसमें भी ब्रह्मा, विष्णु और शिव का भेद रचकर, बताइए, विद्वानों को भी खूब भ्रमित कर देती है, और हरि तथा हर के भेद-भाव को उत्पन्न कर देती है — वह अघटित को घटा देने में अत्यंत चतुर माया ॥ 5 ॥ AI

Sanskrit — Devanagari (original)
निरुपमनित्यनिरंशकेऽप्यखण्डे –
मयि चिति सर्वविकल्पनादिशून्ये ।
घटयति जगदीशजीवभेदं –
त्वघटितघटनापटीयसी माया ॥ 1 ॥
श्रुतिशतनिगमान्तशोधकान-
प्यहह धनादिनिदर्शनेन सद्यः ।
कलुषयति चतुष्पदाद्यभिन्ना-
नघटितघटनापटीयसी माया ॥ 2 ॥
सुखचिदखण्डविबोधमद्वितीयं –
वियदनलादिविनिर्मिते नियोज्य ।
भ्रमयति भवसागरे नितान्तं –
त्वघटितघटनापटीयसी माया ॥ 3 ॥
अपगतगुणवर्णजातिभेदे –
सुखचिति विप्रविडाद्यहङ्कृतिं च ।
स्फुटयति सुतदारगेहमोहं –
त्वघटितघटनापटीयसी माया ॥ 4 ॥
विधिहरिहरविभेदमप्यखण्डे –
बत विरचय्य बुधानपि प्रकामम् ।
भ्रमयति हरिहरभेदभावा-
नघटितघटनापटीयसी माया ॥ 5 ॥
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Telugu script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
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