Summary — Hindi
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The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.
రౌద్రరోగం హర త్వం పురారేర్గురోర్మే ।
రాకేన్దువక్త్రం భవన్తం
మారరూపం కుమారం భజే కామపూరమ్ ॥ 1 ॥
raudrarogaṃ hara tvaṃ purārergurorme |
rākenduvaktraṃ bhavantaṃ
mārarūpaṃ kumāraṃ bhaje kāmapūram || 1 ||
हे रुद्राक्षधारी, आपको नमस्कार है। हे त्रिपुर के शत्रु (शिव) के गुरु के पुत्र, मेरे भयंकर रोग को दूर करें। चन्द्रमा के समान मुख वाले, कामदेव के रूप वाले, कामनाओं को पूर्ण करने वाले कुमार की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 1 ॥ AI
మఙ్గలాపాఙ్గపాతేన భఙ్గాత్స్వరాణామ్ ।
కాలాచ్చ దుష్పాకకూలాత్
కాలకాలస్యసూనుం భజే క్రాన్తసానుమ్ ॥ 2 ॥
maṅgalāpāṅgapātena bhaṅgātsvarāṇām |
kālācca duṣpākakūlāt
kālakālasyasūnuṃ bhaje krāntasānum || 2 ||
हे मंगलमय कटाक्ष की दृष्टि से स्वरों के भंग (नाश) को दूर करने वाले, मुझे घोर रोग से बचाइए। काल के भी काल (शिव) के पुत्र, ऊँचे शिखर वाले (क्रान्तसानु) की मैं भक्ति करता हूँ, जो दुष्पाक (दुर्भाग्य) के काल-प्रवाह से रक्षा करते हैं ॥ 2 ॥ AI
బ్రహ్మపుత్రా గిరౌ యస్య సోపానభూతాః ।
సైన్యం సురాశ్చాపి సర్వే
సామవేదాదిగేయం భజే కార్తికేయమ్ ॥ 3 ॥
brahmaputrā girau yasya sopānabhūtāḥ |
sainyaṃ surāścāpi sarve
sāmavedādigeyaṃ bhaje kārtikeyam || 3 ||
जिनके शिष्य ब्रह्मा आदि हैं, जिनके पर्वत पर ब्रह्मा के पुत्र (सनकादि) सीढ़ी के समान हैं, जिनकी सेना और सभी देवता हैं, सामवेद आदि से जिनका गुणगान होता है, उन कार्तिकेय की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 3 ॥ AI
కామరోగాది సంహారి భిక్షాన్న పాత్రమ్ ।
కారుణ్య సమ్పూర్ణ నేత్రం
శక్తిహస్తం పవిత్రం భజే శమ్భుపుత్రమ్ ॥ 4 ॥
kāmarogādi saṃhāri bhikṣānna pātram |
kāruṇya sampūrṇa netraṃ
śaktihastaṃ pavitraṃ bhaje śambhuputram || 4 ||
काषाय (गेरुए) वस्त्र से ढके शरीर वाले, कामरोग आदि का संहार करने वाले, भिक्षान्न के पात्र वाले, करुणा से पूर्ण नेत्रों वाले, हाथ में शक्ति धारण करने वाले, पवित्र शम्भु-पुत्र की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 4 ॥ AI
సాధుసఙ్ఘస్య రోగాన్ సదా సంహరన్తమ్ ।
ఓఙ్కారతత్త్వం వదన్తం
శమ్భుకర్ణే హసన్తం భజేఽహం శిశుం తమ్ ॥ 5 ॥
sādhusaṅghasya rogān sadā saṃharantam |
oṅkāratattvaṃ vadantaṃ
śambhukarṇe hasantaṃ bhaje'haṃ śiśuṃ tam || 5 ||
श्री स्वामि शैल (स्वामिमलै) पर निवास करने वाले, साधु-समूह के रोगों को सदा दूर करने वाले, ओङ्कार तत्त्व का उपदेश देने वाले, शम्भु (शिव) के कान में हँसने वाले उस बालक (शिशु) की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 5 ॥ AI
దీక్షితానన్తరామేణ సర్వార్థసిద్ధ్యై ।
భక్త్యా పఠేద్యః ప్రభాతే
దేవదేవప్రసాదాత్ లభేతాష్టసిద్ధిమ్ ॥ 6 ॥
dīkṣitānantarāmeṇa sarvārthasiddhyai |
bhaktyā paṭhedyaḥ prabhāte
devadevaprasādāt labhetāṣṭasiddhim || 6 ||
दीक्षित अनन्तराम द्वारा सभी अर्थों की सिद्धि के लिए यह अत्यन्त विचित्र स्तोत्र रचा गया है। जो भक्ति से प्रभात के समय इसे पढ़ता है, वह देवों के देव (मुरुगन) की कृपा से आठ सिद्धियों को प्राप्त करता है ॥ 6 ॥ AI