Lord Murugan

ਸ਼੍ਰੀ ਸ੍ਵਾਮਿਨਾਥ ਪਞ੍ਚਕਮ੍

Shri Svaminatha Panchakam

✍️ Unknown author 📂 Panchakam & Pancharatnam 🖋️ Gurmukhi script 🔢 6 verses 26 views
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🖋️ Script: ਪੰਜਾਬੀ ▾
⚠️ AI-generated translation — the Hindi meaning was produced by AI and automatically cross-checked against the Sanskrit, but it may still contain errors. It has not yet been reviewed by a scholar. Please refer to a traditional commentary for study.
Summary — Hindi
श्री स्वामिनाथ पञ्चकम् में मुरुगन की स्तुति की गई है, जिन्हें रुद्राक्षधारी, शिव के पुत्र और काल के भी काल के पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है। भक्त उनसे भयंकर रोग दूर करने की प्रार्थना करते हैं और उनकी भक्ति करते हैं जो मंगलमय कटाक्ष से स्वरों के नाश को दूर करते हैं तथा दुर्भाग्य से रक्षा करते हैं। स्तोत्र में उनके गुणों का वर्णन है—ब्रह्मा आदि जिनके शिष्य हैं, सामवेद आदि से जिनका गुणगान होता है, और जो काषाय वस्त्र, भिक्षापात्र तथा हाथ में शक्ति धारण करते हैं। अंत में कहा गया है कि दीक्षित अनन्तराम द्वारा रचित इस स्तोत्र को जो भक्ति से प्रभात के समय पढ़ता है, वह मुरुगन की कृपा से आठ सिद्धियों को प्राप्त करता है।

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The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.

Meaning —
ਹੇ ਸ੍ਵਾਮਿਨਾਥਾਰ੍ਤਬਨ੍ਧੋ ।
ਭਸ੍ਮਲਿਪ੍ਤਾਙ੍ਗ ਗਾਙ੍ਗੇਯ ਕਾਰੁਣ੍ਯਸਿਨ੍ਧੋ ॥
Verse 1
ਰੁਦ੍ਰਾਕ੍षਧਾਰਿਨ੍ਨਮਸ੍ਤੇ
ਰੌਦ੍ਰਰੋਗਂ ਹਰ ਤ੍ਵਂ ਪੁਰਾਰੇਰ੍ਗੁਰੋਰ੍ਮੇ ।
ਰਾਕੇਨ੍ਦੁਵਕ੍ਤ੍ਰਂ ਭਵਨ੍ਤਂ
ਮਾਰਰੂਪਂ ਕੁਮਾਰਂ ਭਜੇ ਕਾਮਪੂਰਮ੍ ॥ 1 ॥
rudrākṣadhārinnamaste
raudrarogaṃ hara tvaṃ purārergurorme |
rākenduvaktraṃ bhavantaṃ
mārarūpaṃ kumāraṃ bhaje kāmapūram || 1 ||

हे रुद्राक्षधारी, आपको नमस्कार है। हे त्रिपुर के शत्रु (शिव) के गुरु के पुत्र, मेरे भयंकर रोग को दूर करें। चन्द्रमा के समान मुख वाले, कामदेव के रूप वाले, कामनाओं को पूर्ण करने वाले कुमार की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 1 ॥ AI

Verse 2
ਮਾਂ ਪਾਹਿ ਰੋਗਾਦਘੋਰਾਤ੍
ਮਙ੍ਗਲਾਪਾਙ੍ਗਪਾਤੇਨ ਭਙ੍ਗਾਤ੍ਸ੍ਵਰਾਣਾਮ੍ ।
ਕਾਲਾਚ੍ਚ ਦੁष੍ਪਾਕਕੂਲਾਤ੍
ਕਾਲਕਾਲਸ੍ਯਸੂਨੁਂ ਭਜੇ ਕ੍ਰਾਨ੍ਤਸਾਨੁਮ੍ ॥ 2 ॥
māṃ pāhi rogādaghorāt
maṅgalāpāṅgapātena bhaṅgātsvarāṇām |
kālācca duṣpākakūlāt
kālakālasyasūnuṃ bhaje krāntasānum || 2 ||

हे मंगलमय कटाक्ष की दृष्टि से स्वरों के भंग (नाश) को दूर करने वाले, मुझे घोर रोग से बचाइए। काल के भी काल (शिव) के पुत्र, ऊँचे शिखर वाले (क्रान्तसानु) की मैं भक्ति करता हूँ, जो दुष्पाक (दुर्भाग्य) के काल-प्रवाह से रक्षा करते हैं ॥ 2 ॥ AI

Verse 3
ਬ੍ਰਹ੍ਮਾਦਯੋ ਯਸ੍ਯ ਸ਼ਿष੍ਯਾਃ
ਬ੍ਰਹ੍ਮਪੁਤ੍ਰਾ ਗਿਰੌ ਯਸ੍ਯ ਸੋਪਾਨਭੂਤਾਃ ।
ਸੈਨ੍ਯਂ ਸੁਰਾਸ਼੍ਚਾਪਿ ਸਰ੍ਵੇ
ਸਾਮਵੇਦਾਦਿਗੇਯਂ ਭਜੇ ਕਾਰ੍ਤਿਕੇਯਮ੍ ॥ 3 ॥
brahmādayo yasya śiṣyāḥ
brahmaputrā girau yasya sopānabhūtāḥ |
sainyaṃ surāścāpi sarve
sāmavedādigeyaṃ bhaje kārtikeyam || 3 ||

जिनके शिष्य ब्रह्मा आदि हैं, जिनके पर्वत पर ब्रह्मा के पुत्र (सनकादि) सीढ़ी के समान हैं, जिनकी सेना और सभी देवता हैं, सामवेद आदि से जिनका गुणगान होता है, उन कार्तिकेय की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 3 ॥ AI

Verse 4
ਕਾषਾਯ ਸਂਵੀਤ ਗਾਤ੍ਰਂ
ਕਾਮਰੋਗਾਦਿ ਸਂਹਾਰਿ ਭਿਕ੍षਾਨ੍ਨ ਪਾਤ੍ਰਮ੍ ।
ਕਾਰੁਣ੍ਯ ਸਮ੍ਪੂਰ੍ਣ ਨੇਤ੍ਰਂ
ਸ਼ਕ੍ਤਿਹਸ੍ਤਂ ਪਵਿਤ੍ਰਂ ਭਜੇ ਸ਼ਮ੍ਭੁਪੁਤ੍ਰਮ੍ ॥ 4 ॥
kāṣāya saṃvīta gātraṃ
kāmarogādi saṃhāri bhikṣānna pātram |
kāruṇya sampūrṇa netraṃ
śaktihastaṃ pavitraṃ bhaje śambhuputram || 4 ||

काषाय (गेरुए) वस्त्र से ढके शरीर वाले, कामरोग आदि का संहार करने वाले, भिक्षान्न के पात्र वाले, करुणा से पूर्ण नेत्रों वाले, हाथ में शक्ति धारण करने वाले, पवित्र शम्भु-पुत्र की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 4 ॥ AI

Verse 5
ਸ਼੍ਰੀਸ੍ਵਾਮਿ ਸ਼ੈਲੇ ਵਸਨ੍ਤਂ
ਸਾਧੁਸਙ੍ਘਸ੍ਯ ਰੋਗਾਨ੍ ਸਦਾ ਸਂਹਰਨ੍ਤਮ੍ ।
ਓਙ੍ਕਾਰਤਤ੍ਤ੍ਵਂ ਵਦਨ੍ਤਂ
ਸ਼ਮ੍ਭੁਕਰ੍ਣੇ ਹਸਨ੍ਤਂ ਭਜੇऽਹਂ ਸ਼ਿਸ਼ੁਂ ਤਮ੍ ॥ 5 ॥
śrīsvāmi śaile vasantaṃ
sādhusaṅghasya rogān sadā saṃharantam |
oṅkāratattvaṃ vadantaṃ
śambhukarṇe hasantaṃ bhaje'haṃ śiśuṃ tam || 5 ||

श्री स्वामि शैल (स्वामिमलै) पर निवास करने वाले, साधु-समूह के रोगों को सदा दूर करने वाले, ओङ्कार तत्त्व का उपदेश देने वाले, शम्भु (शिव) के कान में हँसने वाले उस बालक (शिशु) की मैं भक्ति करता हूँ ॥ 5 ॥ AI

Verse 6
ਸ੍ਤੋਤ੍ਰਂ ਕृਤਂ ਚਿਤ੍ਰਚਿਤ੍ਰਂ
ਦੀਕ੍षਿਤਾਨਨ੍ਤਰਾਮੇਣ ਸਰ੍ਵਾਰ੍ਥਸਿਦ੍ਧ੍ਯੈ ।
ਭਕ੍ਤ੍ਯਾ ਪਠੇਦ੍ਯਃ ਪ੍ਰਭਾਤੇ
ਦੇਵਦੇਵਪ੍ਰਸਾਦਾਤ੍ ਲਭੇਤਾष੍ਟਸਿਦ੍ਧਿਮ੍ ॥ 6 ॥
stotraṃ kṛtaṃ citracitraṃ
dīkṣitānantarāmeṇa sarvārthasiddhyai |
bhaktyā paṭhedyaḥ prabhāte
devadevaprasādāt labhetāṣṭasiddhim || 6 ||

दीक्षित अनन्तराम द्वारा सभी अर्थों की सिद्धि के लिए यह अत्यन्त विचित्र स्तोत्र रचा गया है। जो भक्ति से प्रभात के समय इसे पढ़ता है, वह देवों के देव (मुरुगन) की कृपा से आठ सिद्धियों को प्राप्त करता है ॥ 6 ॥ AI

ਇਤਿ ਸ਼੍ਰੀਅਨਨ੍ਤਰਾਮਦੀਕ੍षਿਤਰ੍ ਕृਤਂ ਸ਼੍ਰੀ ਸ੍ਵਾਮਿਨਾਥ ਪਞ੍ਚਕਮ੍ ।
Sanskrit — Devanagari (original)
हे स्वामिनाथार्तबन्धो ।
भस्मलिप्ताङ्ग गाङ्गेय कारुण्यसिन्धो ॥
रुद्राक्षधारिन्नमस्ते
रौद्ररोगं हर त्वं पुरारेर्गुरोर्मे ।
राकेन्दुवक्त्रं भवन्तं
माररूपं कुमारं भजे कामपूरम् ॥ 1 ॥
मां पाहि रोगादघोरात्
मङ्गलापाङ्गपातेन भङ्गात्स्वराणाम् ।
कालाच्च दुष्पाककूलात्
कालकालस्यसूनुं भजे क्रान्तसानुम् ॥ 2 ॥
ब्रह्मादयो यस्य शिष्याः
ब्रह्मपुत्रा गिरौ यस्य सोपानभूताः ।
सैन्यं सुराश्चापि सर्वे
सामवेदादिगेयं भजे कार्तिकेयम् ॥ 3 ॥
काषाय संवीत गात्रं
कामरोगादि संहारि भिक्षान्न पात्रम् ।
कारुण्य सम्पूर्ण नेत्रं
शक्तिहस्तं पवित्रं भजे शम्भुपुत्रम् ॥ 4 ॥
श्रीस्वामि शैले वसन्तं
साधुसङ्घस्य रोगान् सदा संहरन्तम् ।
ओङ्कारतत्त्वं वदन्तं
शम्भुकर्णे हसन्तं भजेऽहं शिशुं तम् ॥ 5 ॥
स्तोत्रं कृतं चित्रचित्रं
दीक्षितानन्तरामेण सर्वार्थसिद्ध्यै ।
भक्त्या पठेद्यः प्रभाते
देवदेवप्रसादात् लभेताष्टसिद्धिम् ॥ 6 ॥
इति श्रीअनन्तरामदीक्षितर् कृतं श्री स्वामिनाथ पञ्चकम् ।
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Gurmukhi script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
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