Summary — Nepali
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Summary — Odia
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The Sanskrit (simple prose explanation) meaning of each verse is shown below the verse.
बाहुभ्यां सम्परिष्वज्य प्रत्युवाच कृताञ्जलिम् ॥ 1 ॥
आदित्यो वा सहस्रांशुः कुर्याद्वितिमिरं नभः ॥ 2 ॥
ādityo vā sahasrāṃśuḥ kuryādvitimiraṃ nabhaḥ || 2 ||
इन्द्रले जति वर्षा गर्दछ, त्यो कुनै ठाउँमा अचम्मको कुरा हुँदैन। सहस्र किरण भएका सूर्यले पनि आकाशलाई अन्धकाररहित बनाउन सक्छन्। AI
ଇନ୍ଦ୍ର ଯେଉଁ ବର୍ଷା ବର୍ଷନ୍ତି, ତାହା କେବେ ବି ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟର ବିଷୟ ନୁହେଁ; ଅଥବା ସହସ୍ରରଶ୍ମି ଆଦିତ୍ୟ ଆକାଶକୁ ଅନ୍ଧକାରମୁକ୍ତ କରିପାରନ୍ତି । AI
यदि इन्द्रः वर्षं वर्षति, तत् क्वचित् चित्रं न भवेत्। अथवा सहस्रांशुः आदित्यः नभः वितिमिरं कुर्यात्। AI
त्वद्विधो वाऽपि मित्राणां प्रतिकुर्यात्परन्तप ॥ 3 ॥
tvadvidho vā'pi mitrāṇāṃ pratikuryātparantapa || 3 ||
चन्द्रमाले आफ्ना किरणहरूद्वारा पृथ्वीलाई शीतल र निर्मल बनाउन सक्छ। हे परन्तप! तिमीजस्तो व्यक्तिले पनि मित्रहरूको उपकार गर्न सक्छ। AI
ଚନ୍ଦ୍ର ନିଜ ରଶ୍ମିଦ୍ୱାରା ପୃଥିବୀକୁ ଶୀତଳ ଓ ନିର୍ମଳ କରିପାରନ୍ତି; ହେ ପରନ୍ତପ, ତୁମ ପରି ଜଣେ ମଧ୍ୟ ମିତ୍ରମାନଙ୍କର ଉପକାର କରିପାରନ୍ତି । AI
चन्द्रमाः स्वैः रश्मिभिः पृथिवीं सौम्यां निर्मलां कुर्यात्। हे परन्तप, त्वद्विधः अपि मित्राणां प्रतिकुर्यात्। AI
जानाम्यहं त्वां सुग्रीव सततं प्रियवादिनम् ॥ 4 ॥
jānāmyahaṃ tvāṃ sugrīva satataṃ priyavādinam || 4 ||
हे सौम्य! यसरी तिमीमा जे शुभ हुन्छ, त्यो अचम्मको कुरा हुँदैन। हे सुग्रीव! म तिमीलाई सधैं प्रिय बोल्ने व्यक्ति भनी जान्दछु। AI
ହେ ସୌମ୍ୟ, ଏହିପରି ତୁମଠାରେ ଯାହା ଶୁଭଦାୟକ, ତାହା ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟର ବିଷୟ ନୁହେଁ; ହେ ସୁଗ୍ରୀବ, ମୁଁ ତୁମକୁ ସର୍ବଦା ପ୍ରିୟବାଦୀ ବୋଲି ଜାଣେ । AI
हे सौम्य, एवं त्वयि यत् शोभनं तत् चित्रं न भवेत्। हे सुग्रीव, अहं त्वां सततं प्रियवादिनं जानामि। AI
त्वमेव मे सुहृतन्मित्रं साहाय्यं कर्तुमर्हसि ॥ 5 ॥
tvameva me suhṛtanmitraṃ sāhāyyaṃ kartumarhasi || 5 ||
हे सखा! तिम्रो संरक्षणमा रहेर म संग्राममा सम्पूर्ण शत्रुहरूलाई जित्नेछु। तिमी नै मेरा सुहृद् र मित्र हौ, तिमीले सहायता गर्नु उचित छ। AI
ହେ ସଖା, ତୁମର ଆଶ୍ରୟ ପାଇ ମୁଁ ସଂଗ୍ରାମରେ ସମସ୍ତ ଶତ୍ରୁଙ୍କୁ ଜୟ କରିବି; ତୁମେ ହିଁ ମୋର ସୁହୃଦ ମିତ୍ର, ତୁମେ ମୋତେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବା ଉଚିତ । AI
हे सखे, त्वत्सनाथः अहं सङ्ख्ये सकलान् अरीन् जेतास्मि। त्वमेव मे सुहृत् मित्रं, साहाय्यं कर्तुम् अर्हसि। AI
वञ्चयित्वा तु पौलोमीमनुह्लादो यथा शचीम् ॥ 6 ॥
vañcayitvā tu paulomīmanuhlādo yathā śacīm || 6 ||
त्यो अधम राक्षसले आफ्नै विनाशका लागि वैदेहीलाई हरण गर्यो, जसरी अनुह्लादले पौलोमीलाई ठगेर शचीलाई हरण गरेको थियो। AI
ସେ ନୀଚ ରାକ୍ଷସ ନିଜ ବିନାଶ ପାଇଁ ବୈଦେହୀଙ୍କୁ ହରଣ କରି ନେଇଛି, ଯେପରି ଅନୁହ୍ଲାଦ ପୌଲୋମୀଙ୍କୁ ପ୍ରତାରଣା କରି ଶଚୀଙ୍କୁ ହରଣ କରିଥିଲେ । AI
राक्षसाधमः आत्मविनाशाय वैदेहीं जहार। यथा अनुह्लादः पौलोमीं शचीं वञ्चयित्वा जहार। AI
पौलोम्याः पितरं दृप्तं शतक्रतुरिवाऽहवे ॥ 7 ॥
paulomyāḥ pitaraṃ dṛptaṃ śatakraturivā'have || 7 ||
म धेरै समयभित्रै ती धारिला बाणहरूद्वारा रावणलाई मार्नेछु, जसरी शतक्रतु इन्द्रले युद्धमा पौलोमीका गर्विष्ठ पितालाई मारेका थिए। AI
ମୁଁ ଅଳ୍ପ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ତୀକ୍ଷ୍ଣ ବାଣଦ୍ୱାରା ସେ ରାବଣକୁ ବଧ କରିବି, ଯେପରି ଶତକ୍ରତୁ ଇନ୍ଦ୍ର ସଂଗ୍ରାମରେ ପୌଲୋମୀଙ୍କ ପିତା ଦର୍ପିତ ଅନୁହ୍ଲାଦକୁ ବଧ କରିଥିଲେ । AI
न चिरात् तं रावणं निशितैः शरैः हनिष्यामि। यथा शतक्रतुः आहवे दृप्तं पौलोम्याः पितरं हनिष्यति। AI
उष्णां तीव्रां सहस्रांशोश्छादयद्गगने प्रभाम् ॥ 8 ॥
uṣṇāṃ tīvrāṃ sahasrāṃśośchādayadgagane prabhām || 8 ||
यसै बीचमा धुलोको मेघ आयो। सहस्र किरण भएका सूर्यको तातो र तीव्र किरणलाई त्यसले आकाशमा ढाक्यो। AI
ଏହି ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ଧୂଳି ଉଠି ଆସିଲା; ସହସ୍ରରଶ୍ମି ସୂର୍ଯ୍ୟଙ୍କର ଉଷ୍ଣ ଓ ତୀବ୍ର ପ୍ରଭାକୁ ସେ ଆକାଶରେ ଆଚ୍ଛାଦିତ କରିଦେଲା । AI
एतस्मिन् अन्तरे एव रजः समभिवर्तत। तत् सहस्रांशोः उष्णां तीव्रां प्रभां गगने छादयत्। AI
चचाल च मही सर्वा सशैलवनकानना ॥ 9 ॥
cacāla ca mahī sarvā saśailavanakānanā || 9 ||
त्यस मूर्छित गराउने धुलोले दिशाहरू अत्यन्त आकुल भए। पर्वत, वन र काननसहित सम्पूर्ण पृथ्वी कम्पित भई। AI
ସେ ଘନୀଭୂତ ଧୂଳିଦ୍ୱାରା ଦିଗମାନ ଆକୁଳ ହୋଇଗଲା; ପର୍ବତ, ବନ ଓ କାନନ ସହିତ ସମଗ୍ର ପୃଥିବୀ କମ୍ପିତ ହେଲା । AI
तेन मूर्छता रजसा दिशः पर्याकुलाः आसन्। सशैलवनकानना सर्वा मही चचाल। AI
कृत्स्ना सञ्छादिता भूमिरसङ्ख्येयैः प्लवङ्गमैः ॥ 10 ॥
kṛtsnā sañchāditā bhūmirasaṅkhyeyaiḥ plavaṅgamaiḥ || 10 ||
त्यसपछि पर्वतराजजस्ता, धारिला दाँत भएका, महाबली र असंख्य वानरहरूले सम्पूर्ण भूमि ढाके । AI
ତା'ପରେ ପର୍ବତରାଜ ସଦୃଶ, ତୀକ୍ଷ୍ଣ ଦନ୍ତଯୁକ୍ତ, ମହାବଳଶାଳୀ ଅସଂଖ୍ୟ ବାନରମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ସମଗ୍ର ଭୂମି ଆଚ୍ଛାଦିତ ହେଲା ॥ 10 ॥ AI
कोटीशतपरीवारैः कामरूपिभिरावृता ॥ 11 ॥
koṭīśataparīvāraiḥ kāmarūpibhirāvṛtā || 11 ||
त्यसपछि एक निमेषभरमै ती करोडौंको समूहले घेरिएका, इच्छानुसार रूप धारण गर्ने हरियूथप (वानरसेनापति) हरूले ढाके । AI
ତା'ପରେ ଏକ ନିମେଷ ମାତ୍ର ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ସେହି କୋଟି ଶତ ସଂଖ୍ୟକ ପରିବାର ସହିତ ଇଚ୍ଛାଧାରୀ ବାନର ସେନାପତିମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା (ସେ ସ୍ଥାନ) ଆବୃତ ହେଲା ॥ 11 ॥ AI
हरिभिर्मेघनिर्ह्रादैरन्यैश्च वनचारिभिः ॥ 12 ॥
haribhirmeghanirhrādairanyaiśca vanacāribhiḥ || 12 ||
नदीवासी, पर्वतवासी र समुद्रवासी महाबली वानरहरू, मेघसमान गर्जना गर्ने हरि र अरू वनचरहरूले पनि ढाके । AI
ନଦୀଜାତ, ପର୍ବତବାସୀ ଓ ସମୁଦ୍ରଜାତ ମହାବଳଶାଳୀ ବାନର, ମେଘଗର୍ଜନ ସଦୃଶ ନାଦକାରୀ ବାନର ଏବଂ ଅନ୍ୟ ବନଚର ବାନରମାନେ ॥ 12 ॥ AI
पद्मकेसरवर्णैश्च श्वेतैर्मेरुकृतालयैः ॥ 13 ॥
padmakesaravarṇaiśca śvetairmerukṛtālayaiḥ || 13 ||
उदाउँदो सूर्यको वर्ण भएका, चन्द्रमाजस्तै गोरा, कमलको केसरजस्तो वर्ण भएका, सेता र मेरु पर्वतमा बस्ने वानरहरूले पनि ढाके । AI
ନବୋଦିତ ସୂର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ବର୍ଣ୍ଣ ଭଳି, ଚନ୍ଦ୍ର ପରି ଧଳା, ପଦ୍ମକେଶର ବର୍ଣ୍ଣ ଭଳି ଏବଂ ମେରୁ ପର୍ବତରେ ବାସ କରୁଥିବା ଶ୍ୱେତ ବାନରମାନେ ॥ 13 ॥ AI
वीरश्शतवलिर्नाम वानरः प्रत्यदृश्यत ॥ 14 ॥
vīraśśatavalirnāma vānaraḥ pratyadṛśyata || 14 ||
त्यसबेला दश हजार करोड वानरहरूले घेरिएका, शोभायुक्त, वीर र शतबलि नामका वानर देखा परे । AI
ସେତେବେଳେ ଦଶ ହଜାର କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ଶ୍ରୀମାନ୍ ଶତବଳି ନାମକ ବୀର ବାନର ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଲେ ॥ 14 ॥ AI
अनेकैर्दशसाहस्रैः कोटिभिः प्रत्यदृश्यत ॥ 15 ॥
anekairdaśasāhasraiḥ koṭibhiḥ pratyadṛśyata || 15 ||
त्यसपछि सुनौलो पर्वतजस्तो देखिने, ताराका वीर्यवान् पिता अनेक दश हजार करोड वानरहरूसँग देखा परे । AI
ତା'ପରେ ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣ ପର୍ବତ ସଦୃଶ ତାରାଙ୍କ ବୀର୍ଯ୍ୟବାନ ପିତା ଅନେକ ଦଶ ସହସ୍ର କୋଟି ବାନରଙ୍କ ସହିତ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଲେ ॥ 15 ॥ AI
पिता रुमाया सम्प्राप्तस्सुग्रीवश्वशुरो विभुः ॥ 16 ॥
pitā rumāyā samprāptassugrīvaśvaśuro vibhuḥ || 16 ||
त्यसैगरी अर्कोतर्फ एक हजार करोड वानरहरूसँग समन्वित, रुमाका पिता र सुग्रीवका ससुरा, प्रभु देखा परे । AI
ସେହିପରି ଅନ୍ୟ ଏକ ହଜାର କୋଟି ବାନରଙ୍କ ସହିତ ଯୁକ୍ତ ରୁମାଙ୍କ ପିତା, ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ଶ୍ୱଶୁର, ପ୍ରଭୁ ଉପସ୍ଥିତ ହେଲେ ॥ 16 ॥ AI
बुद्धिमान्वानरश्रेष्ठस्सर्ववानरसत्तमः ॥ 17 ॥
buddhimānvānaraśreṣṭhassarvavānarasattamaḥ || 17 ||
कमलको केसरजस्तो वर्ण भएका, उदाउँदो सूर्यजस्तो मुख भएका, बुद्धिमान्, वानरश्रेष्ठ र सम्पूर्ण वानरहरूमध्ये उत्तम । AI
ପଦ୍ମକେଶର ସଦୃଶ, ନବୋଦିତ ସୂର୍ଯ୍ୟ ପରି ମୁଖଯୁକ୍ତ, ବୁଦ୍ଧିମାନ, ବାନରଶ୍ରେଷ୍ଠ ଓ ସର୍ବଶ୍ରେଷ୍ଠ ବାନର ॥ 17 ॥ AI
पिता हनुमतश्रशीमान्केसरी प्रत्यदृश्यत ॥ 18 ॥
pitā hanumataśraśīmānkesarī pratyadṛśyata || 18 ||
हनुमान्का पिता, तेजस्वी केसरी, अनेक हजारौं वानरहरूले घेरिएको अवस्थामा देखा परे। AI
ଅନେକ ହଜାରେ ବାନରଙ୍କ ସହିତ ଯୁକ୍ତ, ହନୁମାନଙ୍କ ପିତା, କୀର୍ତ୍ତିମାନ କେସରୀ ଦେଖାଗଲେ। AI
वृतः कोटिसहस्रेण वानराणामदृश्यत ॥ 19 ॥
vṛtaḥ koṭisahasreṇa vānarāṇāmadṛśyata || 19 ||
गोलाङ्गूलहरूका महाराज, भयानक पराक्रम भएका गवाक्ष, एक हजार करोड वानरहरूले घेरिएको अवस्थामा देखा परे। AI
ଗୋଲାଙ୍ଗୂଳ ମହାରାଜ, ଭୀମ ପରାକ୍ରମୀ ଗବାକ୍ଷ, ଏକ ହଜାର କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଦେଖାଗଲେ। AI
वृतः कोटिसहस्राभ्यां द्वाभ्यां समभिवर्तत ॥ 20 ॥
vṛtaḥ koṭisahasrābhyāṃ dvābhyāṃ samabhivartata || 20 ||
भयानक वेग भएका र शत्रुहरूको संहार गर्ने ऋक्षहरूका राजा धूम्र, दुई हजार करोड ऋक्षहरूले घेरिएर आए। AI
ଭୀମ ବେଗଶାଳୀ ଭାଲୁମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଶତ୍ରୁନାଶକ ଧୂମ୍ର, ଦୁଇ ହଜାର କୋଟି (କୋଟି ସହସ୍ର ଦ୍ୱୟ) ଭାଲୁଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ସମ୍ମୁଖକୁ ଆସିଲେ। AI
आजगाम महावीर्यस्तिसृभिः कोटिभिर्वृतः ॥ 21 ॥
ājagāma mahāvīryastisṛbhiḥ koṭibhirvṛtaḥ || 21 ||
ठूला पर्वतजस्ता भयानक र महान् पराक्रम भएका पनस नामका यूथपति, तीन करोड वानरहरूले घेरिएर आए। AI
ମହାପର୍ବତ ସଦୃଶ ଭୟଙ୍କର, ମହାବୀର୍ଯ୍ୟଶାଳୀ ପନସ ନାମକ ଯୂଥପତି ତିନି କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଆସିଲେ। AI
अदृश्यत महाकायः कोटिभिर्दशभिर्वृतः ॥ 22 ॥
adṛśyata mahākāyaḥ koṭibhirdaśabhirvṛtaḥ || 22 ||
नीलाञ्जनको राशिजस्तो शरीर भएका, विशालकाय नील नामका यूथपति, दश करोड वानरहरूले घेरिएको अवस्थामा देखा परे। AI
ନୀଳାଞ୍ଜନ ପୁଞ୍ଜ ସଦୃଶ ରୂପଧାରୀ, ମହାକାୟ ନୀଳ ନାମକ ଯୂଥପତି ଦଶ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଦେଖାଗଲେ। AI
आजगाम महावीर्यः पञ्चभिः कोटिभिर्वृतः ॥ 23 ॥
ājagāma mahāvīryaḥ pañcabhiḥ koṭibhirvṛtaḥ || 23 ||
त्यसपछि सुनको पर्वतजस्तो वर्ण भएका, महान् पराक्रम भएका गवय नामका यूथपति, पाँच करोड वानरहरूले घेरिएर आए। AI
ତା’ପରେ ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣ ପର୍ବତ ସଦୃଶ, ମହାବୀର୍ଯ୍ୟଶାଳୀ ଗବୟ ନାମକ ଯୂଥପତି ପାଞ୍ଚ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଆସିଲେ। AI
वृतः कोटिसहस्रेण सुग्रीवं समुपस्थितः ॥ 24 ॥
vṛtaḥ koṭisahasreṇa sugrīvaṃ samupasthitaḥ || 24 ||
बलवान् दरीमुख नामका यूथपति पनि त्यसबेला एक हजार करोड वानरहरूले घेरिएर सुग्रीवकहाँ आए। AI
ବଳବାନ ଦରୀମୁଖ ନାମକ ଯୂଥପତି ସେତେବେଳେ ଏକ ହଜାର କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ନିକଟକୁ ଆସିଲେ। AI
कोटिकोटिसहस्रेण वानराणामदृश्यताम् ॥ 25 ॥
koṭikoṭisahasreṇa vānarāṇāmadṛśyatām || 25 ||
अश्विपुत्रका समान महाबली मैन्द र द्विविद दुवै, एक हजार करोड करोड वानरहरूले घेरिएको अवस्थामा देखा परे। AI
ମହାବଳଶାଳୀ ଅଶ୍ୱିପୁତ୍ର ମୈନ୍ଦ ଓ ଦ୍ୱିବିଦ ଉଭୟେ ଏକ ହଜାର କୋଟି କୋଟି ବାନରଙ୍କ ସହିତ ଦେଖାଗଲେ। AI
आजगाम महातेजा सुग्रीवस्य समीपतः ॥ 26 ॥
ājagāma mahātejā sugrīvasya samīpataḥ || 26 ||
तीन करोड वानरहरूले घेरिएका, बलवान् र वीर गज नामक वानर, महान् तेज भएका, सुग्रीवको नजिक आए। AI
ମହାବଳବାନ ଓ ମହାତେଜସ୍ଵୀ ବୀର ଗଜ ତିନି କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ଵାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ସମୀପକୁ ଆସିଲେ । AI
कोटिभिर्दशभिः प्राप्तः सुग्रीवस्य वशे स्थितः ॥ 27 ॥
koṭibhirdaśabhiḥ prāptaḥ sugrīvasya vaśe sthitaḥ || 27 ||
महान् तेज भएका, नामले जाम्बवान् भनिने भालुहरूका राजा, दश करोड भालुहरूसँग आई सुग्रीवको अधीनमा रहे। AI
ମହାତେଜସ୍ଵୀ ଭାଲୁମାନଙ୍କ ରାଜା ଜାମ୍ବବାନ ନାମକ ବୀର ଦଶ କୋଟି ଭାଲୁଙ୍କ ସହିତ ଆସି ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ଅଧୀନରେ ରହିଲେ । AI
आययौ बलवांस्तूर्णं कोटीशतसमावृतः ॥ 28 ॥
āyayau balavāṃstūrṇaṃ koṭīśatasamāvṛtaḥ || 28 ||
विक्रमशाली र बलवान् रुमण्वान् नामक वानर, एक सय करोड वानरहरूले घेरिएर, वानरेश्वर सुग्रीवकहाँ शीघ्र आए। AI
ବିକ୍ରମଶାଳୀ ଓ ବଳବାନ ବାନର ରୁମଣ୍ଵାନ ଏକ ଶତ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ଵାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଶୀଘ୍ର ବାନରେଶ୍ଵର ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ନିକଟକୁ ଆସିଲେ । AI
पृष्ठतोऽनुगतः प्राप्तो हरिभिर्गन्धमादनः ॥ 29 ॥
pṛṣṭhato'nugataḥ prāpto haribhirgandhamādanaḥ || 29 ||
त्यसपछि गन्धमादन नामक वानर, एक हजार करोड र एक सय करोड (अर्थात् एक लाख करोड) वानरहरूले पछि लागेर आए। AI
ତାପରେ ଗନ୍ଧମାଦନ ପର୍ବତ ଏକ ହଜାର ଏକ ଶତ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ଵାରା ପଛରୁ ଅନୁଗମନ କରାଯାଇ ସେଠାରେ ପହଞ୍ଚିଲେ । AI
युवराजोऽङ्गदः प्राप्तः पितृतुल्यपराक्रमः ॥ 30 ॥
yuvarājo'ṅgadaḥ prāptaḥ pitṛtulyaparākramaḥ || 30 ||
त्यसपछि पिताको समान पराक्रम भएका युवराज अङ्गद, एक लाख पद्म र एक सय शङ्कु (विशेष संख्याका) वानरहरूले घेरिएर आए। AI
ତାପରେ ପିତାଙ୍କ ସମାନ ପରାକ୍ରମଶାଳୀ ଯୁବରାଜ ଅଙ୍ଗଦ ଏକ ହଜାର ପଦ୍ମ ଓ ଏକ ଶତ ଶଙ୍କୁ ବାନରଙ୍କ ଦ୍ଵାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଆସିଲେ । AI
पञ्चभिर्हरिकोटीभिर्दूरतः प्रत्यदृश्यत ॥ 31 ॥
pañcabhirharikoṭībhirdūrataḥ pratyadṛśyata || 31 ||
त्यसपछि ताराको जस्तो द्युति भएका, भयानक पराक्रम भएका तार नामक वानर, पाँच करोड वानरहरूसँग टाढैबाट देखिए। AI
ତାପରେ ତାରାଙ୍କ ପରି ଦୀପ୍ତିମାନ ଭୀମପରାକ୍ରମୀ ବାନର ତାର ପାଞ୍ଚ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ସହିତ ଦୂରରୁ ଦୃଶ୍ୟ ହେଲେ । AI
एकादशानां कोटीनामीश्वरस्तैस्समावृतः ॥ 32 ॥
ekādaśānāṃ koṭīnāmīśvarastaissamāvṛtaḥ || 32 ||
वीर यूथपति इन्द्रजानु, एघार करोड वानरहरूका स्वामी भई, तिनै वानरहरूले घेरिएर देखिए। AI
ବୀର ଯୂଥପତି ଇନ୍ଦ୍ରଜାନୁ ଏଗାର କୋଟି ବାନରଙ୍କର ଅଧୀଶ୍ଵର ହୋଇ ସେମାନଙ୍କ ଦ୍ଵାରା ପରିବୃତ ଭାବରେ ଦୃଶ୍ୟ ହେଲେ । AI
अयुतेनावृतश्चैव सहस्रेण शतेन च ॥ 33 ॥
ayutenāvṛtaścaiva sahasreṇa śatena ca || 33 ||
त्यसपछि नवोदित सूर्यजस्तो देखिने रम्भ नामक वानर, दश हजार, एक हजार र एक सय वानरहरूले घेरिएर आए। AI
ତାପରେ ନବୋଦିତ ସୂର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ସଦୃଶ ରମ୍ଭ ଦଶ ହଜାର, ଏକ ହଜାର ଓ ଏକ ଶତ ବାନରଙ୍କ ଦ୍ଵାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଆସି ପହଞ୍ଚିଲେ । AI
प्रत्यदृश्यत कोटीभ्यां द्वाभ्यां परिवृतो बली ॥ 34 ॥
pratyadṛśyata koṭībhyāṃ dvābhyāṃ parivṛto balī || 34 ||
त्यसपछि दुई करोड वानरहरूले घेरिएका, बलवान् र वीर यूथपति दुर्मुख नामका वानर देखा परे। AI
ତା'ପରେ ବୀର ଓ ବଳବାନ ଯୂଥପତି ଦୁର୍ମୁଖ ନାମକ ବାନର ଦୁଇ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଲେ। AI
वृतः कोटिसहस्रेण हनुमान्प्रत्यदृश्यत ॥ 35 ॥
vṛtaḥ koṭisahasreṇa hanumānpratyadṛśyata || 35 ||
कैलास शिखरजस्तै आकार भएका, भयानक पराक्रम भएका वानरहरूले घेरिएका हनुमान् एक हजार करोड वानरसहित देखा परे। AI
କୈଳାସ ଶିଖର ପରି ଆକାର ବିଶିଷ୍ଟ, ଭୟଙ୍କର ପରାକ୍ରମୀ ବାନରମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଏକ ହଜାର କୋଟି ବାନରରେ ପରିବୃତ ହନୁମାନ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଲେ। AI
कोटीशतेन सम्प्राप्तस्सहस्रेण शतेन च ॥ 36 ॥
koṭīśatena samprāptassahasreṇa śatena ca || 36 ||
महापराक्रमी नल पनि वृक्षवासी वानरहरूले घेरिएर एक सय एक हजार करोड वानरसहित आए। AI
ମହାବୀର୍ଯ୍ୟଶାଳୀ ନଳ ମଧ୍ୟ ବୃକ୍ଷବାସୀ ବାନରମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ଏକ ଶତ କୋଟି ଏବଂ ଏକ ହଜାର ଏକ ଶତ ବାନରଙ୍କ ସହ ଆସି ପହଞ୍ଚିଲେ। AI
सम्प्राप्तोऽभिमतस्तस्य सुग्रीवस्य महात्मनः ॥ 37 ॥
samprāpto'bhimatastasya sugrīvasya mahātmanaḥ || 37 ||
त्यसपछि शोभाशाली दधिमुख दश करोड वानरहरूले घेरिएर महात्मा सुग्रीवका प्रिय भई उनकहाँ आए। AI
ତା'ପରେ ଶ୍ରୀମାନ ଦଧିମୁଖ ଦଶ କୋଟି ବାନରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ପରିବୃତ ହୋଇ ମହାତ୍ମା ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ନିକଟକୁ ପ୍ରିୟ ଭାବରେ ଆସି ପହଞ୍ଚିଲେ। AI
एते चान्ये च बहवो वानराः कामरूपिणः ॥ 38 ॥
ete cānye ca bahavo vānarāḥ kāmarūpiṇaḥ || 38 ||
शरभ, कुमुद, वह्नि र वानर रंह — यी र अरू धेरै कामरूपधारी वानरहरू। AI
ଶରଭ, କୁମୁଦ, ବହ୍ନି, ରଂହ ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଅନେକ କାମରୂପୀ ବାନରମାନେ ମଧ୍ୟ ଆସିଲେ। AI
यूथपा स्समनुप्राप्ता स्तेषां सङ्ख्या न विद्यते ॥ 39 ॥
yūthapā ssamanuprāptā steṣāṃ saṅkhyā na vidyate || 39 ||
सम्पूर्ण पृथ्वी, पर्वत र वनहरूलाई ढाकेर यूथपतिहरू आए; तिनको संख्या ज्ञात छैन। AI
ସମସ୍ତ ପୃଥିବୀ, ପର୍ବତ ଓ ବନମାନଙ୍କୁ ଆଚ୍ଛାଦନ କରି ଯୂଥପତିମାନେ ଆସି ପହଞ୍ଚିଲେ; ସେମାନଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ଜଣା ନାହିଁ। AI
आप्लवन्तः प्लवन्तश्च गर्जन्तश्च प्लवङ्गमाः ।
अभ्यवर्तन्त सुग्रीवं सूर्यमभ्रगणा इव ॥ 40 ॥
āplavantaḥ plavantaśca garjantaśca plavaṅgamāḥ |
abhyavartanta sugrīvaṃ sūryamabhragaṇā iva || 40 ||
पृथ्वीमा भएका सबै विशिष्ट वानरहरू आए; ती प्लवङ्गमहरू डुबुल्की मार्दै, उफ्रँदै र गर्जना गर्दै बादलका समूहहरू सूर्यतर्फ अघि बढेझैँ सुग्रीवतर्फ अघि बढे। AI
ପୃଥିବୀର ସମସ୍ତ ବିଶିଷ୍ଟ ବାନରମାନେ ଆସିଲେ; ସେହି ପ୍ଲବଙ୍ଗମମାନେ ଡେଇଁ ଡେଇଁ, ପହଁରି ପହଁରି ଓ ଗର୍ଜନ କରି ମେଘପୁଞ୍ଜ ଯେପରି ସୂର୍ଯ୍ୟଙ୍କ ନିକଟକୁ ଆସନ୍ତି, ସେହିପରି ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ନିକଟକୁ ଆସିଲେ। AI
शिरोभिर्वानरेन्द्राय सुग्रीवाय न्यवेदयन् ॥ 41 ॥
śirobhirvānarendrāya sugrīvāya nyavedayan || 41 ||
ठूला भुजा भएका ती प्रसन्न वानरहरूले धेरै आवाजहरू गर्दै शिर निहुराएर वानरेन्द्र सुग्रीवलाई आफ्नो आगमन जनाए। AI
ପ୍ରଫୁଲ୍ଲିତ ଓ ବାହୁଶାଳୀ ସେମାନେ ଅନେକ ଶବ୍ଦ କରି ମସ୍ତକ ନତ କରି ବାନରେନ୍ଦ୍ର ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କୁ ନିଜର ଆଗମନ ଜଣାଇଲେ। AI
सुग्रीवेण समागम्य स्थिताः प्राञ्जलय स्तदा ॥ 42 ॥
sugrīveṇa samāgamya sthitāḥ prāñjalaya stadā || 42 ||
अरू वानरश्रेष्ठहरूले पनि उचित रूपमा एकसाथ भेला भई सुग्रीवसँग भेट गरेर त्यसपछि हात जोडेर उभिए । AI
ଅନ୍ୟ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ବାନରମାନେ ଯଥାଯୋଗ୍ୟ ଭାବରେ ଏକତ୍ରିତ ହୋଇ ସୁଗ୍ରୀବଙ୍କ ସହିତ ମିଳିତ ହୋଇ ସେତେବେଳେ ହାତ ଯୋଡ଼ି ଠିଆ ହେଲେ । AI
निवेदयित्वा धर्मज्ञः स्थितः प्राञ्जलिरब्रवीत् ॥ 43 ॥
nivedayitvā dharmajñaḥ sthitaḥ prāñjalirabravīt || 43 ||
धर्मज्ञ सुग्रीवले हतारिँदै ती सबै वानरश्रेष्ठहरूलाई रामसँग चिनाएर हात जोडेर उभिएर बोले । AI
ଧର୍ମଜ୍ଞ ସୁଗ୍ରୀବ ଶୀଘ୍ର ସେହି ସମସ୍ତ ବାନରଶ୍ରେଷ୍ଠମାନଙ୍କୁ ରାମଙ୍କ ନିକଟରେ ଅର୍ପଣ କରି ହାତ ଯୋଡ଼ି ଠିଆ ହୋଇ କହିଲେ । AI
निवेशयित्वा विधिवद्बलानि बलं बलज्ञः प्रतिपत्तुमीष्टे ॥ 44 ॥
niveśayitvā vidhivadbalāni balaṃ balajñaḥ pratipattumīṣṭe || 44 ||
हे वानरेन्द्रहरू, सबै वनहरूमा र पर्वतका झरनाहरूमा आ-आफ्नो सुखअनुसार सेनाहरूलाई विधिपूर्वक बसालेर बल जान्ने उनले (सुग्रीवले) बल प्राप्त गर्न चाहे । AI
ହେ ବାନରେନ୍ଦ୍ରମାନେ, ପର୍ବତର ଝରଣା ଓ ସମସ୍ତ ବନରେ ସେମାନଙ୍କୁ ଯଥାସୁଖ ରଖାଇ, ବଳଜ୍ଞ ସେ ବିଧିପୂର୍ବକ ସୈନ୍ୟମାନଙ୍କୁ ସ୍ଥାପନ କରି ବଳ ଗ୍ରହଣ କରିବାକୁ ଇଚ୍ଛା କରୁଛନ୍ତି । AI