Summary — Hindi
AI-generated · not yet verified
The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.
ধ্যানম্ ।
ধ্যেযঃ সদা সবিতৃমণ্ডলমধ্যবর্তী
নারাযণঃ সরসিজাসনসন্নিবিষ্টঃ ।
কেযূরবান্ মকরকুণ্ডলবান্ কিরীটী
হারী হিরণ্মযবপুর্ধৃতশঙ্খচক্রঃ ॥
স্তোত্রম্ ।
ওঁ বিশ্ববিদ্বিশ্বজিত্কর্তা বিশ্বাত্মা বিশ্বতোমুখঃ ।
বিশ্বেশ্বরো বিশ্বযোনির্নিযতাত্মা জিতেন্দ্রিযঃ ॥ 1 ॥
dhyānam |
dhyeyaḥ sadā savitṛmaṇḍalamadhyavartī
nārāyaṇaḥ sarasijāsanasanniviṣṭaḥ |
keyūravān makarakuṇḍalavān kirīṭī
hārī hiraṇmayavapurdhṛtaśaṅkhacakraḥ ||
stotram |
oṃ viśvavidviśvajitkartā viśvātmā viśvatomukhaḥ |
viśveśvaro viśvayonirniyatātmā jitendriyaḥ || 1 ||
इस श्री सूर्य सहस्रनाम स्तोत्र के ऋषि वेदव्यास हैं, छन्द अनुष्टुप है, देवता सविता हैं, और सभी अभीष्टों की सिद्धि के लिए जप में इसका विनियोग है। ध्यान। सदा उस सविता के मण्डल के मध्य में स्थित नारायण का ध्यान करना चाहिए, जो कमल के आसन पर विराजमान हैं, जो केयूर धारण करते हैं, मकर के कुण्डल पहनते हैं, किरीट धारी हैं, हार पहने हैं, जिनका शरीर स्वर्णमय है और जो शंख तथा चक्र धारण करते हैं। स्तोत्र। ॐ, जो विश्व को जानने वाले, विश्व को जीतने वाले, विश्व के कर्ता, विश्वात्मा, सब ओर मुख वाले, विश्व के ईश्वर, विश्व के उद्गम, नियत आत्मा वाले और जितेन्द्रिय हैं। AI
মহাযোগী মহাসিদ্ধির্মহাত্মা সুমহাবলঃ ॥ 2 ॥
mahāyogī mahāsiddhirmahātmā sumahābalaḥ || 2 ||
जो काल के आश्रय हैं, काल के कर्ता हैं, काल का हनन करने वाले हैं, काल का नाश करने वाले हैं, महायोगी हैं, महासिद्धि हैं, महात्मा हैं और अत्यन्त महाबलशाली हैं। AI
ভূতভব্যো ভাবিতাত্মা ভূতান্তঃকরণং শিবঃ ॥ 3 ॥
bhūtabhavyo bhāvitātmā bhūtāntaḥkaraṇaṃ śivaḥ || 3 ||
जो प्रभु हैं, विभु हैं, भूतों के नाथ हैं, भूतात्मा हैं, भुवन के ईश्वर हैं, भूत और भविष्य हैं, भावित आत्मा वाले हैं, प्राणियों के अन्तःकरण हैं और शिव हैं। AI
বরেণ্যো বরদো যোগী সুসংযুক্তঃ প্রকাশকঃ ॥ 4 ॥
vareṇyo varado yogī susaṃyuktaḥ prakāśakaḥ || 4 ||
जो शरण देने वाले हैं, कमला के आनन्द हैं, आनन्द देने वाले हैं, आनन्द की वृद्धि करने वाले हैं, वरेण्य हैं, वरदाता हैं, योगी हैं, सुसंयुक्त हैं और प्रकाश करने वाले हैं। AI
নযঃ সহস্রপাত্ সাধুর্দিব্যকুণ্ডলমণ্ডিতঃ ॥ 5 ॥
nayaḥ sahasrapāt sādhurdivyakuṇḍalamaṇḍitaḥ || 5 ||
जो प्राप्त गति वाले हैं, परम प्राण हैं, पवित्र आत्मा वाले हैं, प्रिय हैं, प्रियकर हैं, नीति हैं, सहस्र पैरों वाले हैं, साधु हैं और दिव्य कुण्डलों से मण्डित हैं। AI
সমাহিতমতির্দাতা বিধাতা কৃতমঙ্গলঃ ॥ 6 ॥
samāhitamatirdātā vidhātā kṛtamaṅgalaḥ || 6 ||
जो अव्यंग धारण करने वाले हैं, धीर आत्मा वाले हैं, सविता हैं, वायु को वाहन बनाने वाले हैं, समाहित मति वाले हैं, दाता हैं, विधाता हैं और जिन्होंने मंगल किया है। AI
সমাযুক্তো বিমুক্তাত্মা কৃতাত্মা কৃতিনাং বরঃ ॥ 7 ॥
samāyukto vimuktātmā kṛtātmā kṛtināṃ varaḥ || 7 ||
जो कपर्दी हैं, कल्पवृक्ष रूप रुद्र हैं, सुमना हैं, धर्म के वत्सल हैं, समायुक्त हैं, विमुक्त आत्मा वाले हैं, कृतात्मा हैं और कृतियों में श्रेष्ठ हैं। AI
কান্তঃ কামারিরাদিত্যো নিযতাত্মা নিরাকুলঃ ॥ 8 ॥
kāntaḥ kāmārirādityo niyatātmā nirākulaḥ || 8 ||
जो अविचिन्त्य शरीर वाले हैं, श्रेष्ठ हैं, महायोगी हैं, महेश्वर हैं, कान्त हैं, काम के शत्रु हैं, आदित्य हैं, नियत आत्मा वाले हैं और निराकुल हैं। AI
সপ্তসপ্তিরচিন্ত্যাত্মা মহাকারুণিকোত্তমঃ ॥ 9 ॥
saptasaptiracintyātmā mahākāruṇikottamaḥ || 9 ||
वे कामदेव हैं, करुणामय हैं, सृष्टिकर्ता हैं, कमलाकर (कमल-समूह या तालाब) को जानने वाले हैं। उनके सात घोड़े हैं, उनका स्वरूप अचिन्त्य है, वे महान करुणामयों में श्रेष्ठ हैं। AI
অযুক্তো বিশ্বনিলযঃ সংবিভাগী বৃষধ্বজঃ ॥ 10 ॥
ayukto viśvanilayaḥ saṃvibhāgī vṛṣadhvajaḥ || 10 ||
वे संजीवन करने वाले हैं, जीवों के स्वामी हैं, विजयस्वरूप हैं, जीव हैं, जगत के पति हैं। वे अयुक्त (असंयुक्त/अलिप्त) हैं, विश्व के आश्रय हैं, सबका भाग देने वाले हैं और वृषध्वज (वृषभ-ध्वजा वाले) हैं। AI
একচক্ররথো মৌনী সুরথো রথিনাং বরঃ ॥ 11 ॥
ekacakraratho maunī suratho rathināṃ varaḥ || 11 ||
वे वृषाकपि हैं, कल्प के कर्ता हैं, कल्प के अन्त को करने वाले हैं, रवि हैं। उनका रथ एक चक्र वाला है, वे मौनी हैं, सुरथ हैं और रथियों में श्रेष्ठ हैं। AI
দিব্যকৃদ্দিনকৃদ্দেবো দেবদেবো দিবস্পতিঃ ॥ 12 ॥
divyakṛddinakṛddevo devadevo divaspatiḥ || 12 ||
वे क्रोध से युक्त हैं, रश्मिमाली हैं, तेज की राशि हैं, विभावसु हैं। वे दिव्य की रचना करने वाले हैं, दिन को बनाने वाले हैं, देव हैं, देवों के देव हैं और दिन के स्वामी हैं। AI
যজ্ঞো যজ্ঞপতিঃ পূষা স্বর্ণরেতাঃ পরাবরঃ ॥ 13 ॥
yajño yajñapatiḥ pūṣā svarṇaretāḥ parāvaraḥ || 13 ||
वे दीनों के नाथ हैं, हर (हरण करने वाले) हैं, होता हैं, दिव्य बाहुओं वाले हैं, दिवाकर हैं। वे यज्ञ हैं, यज्ञ के पति हैं, पूषा हैं, स्वर्णरेताः (स्वर्ण-वीर्य वाले) हैं और परावर हैं। AI
প্রাজ্ঞঃ প্রাজ্ঞপতিঃ সূর্যঃ সবিতা বিষ্ণুরংশুমান্ ॥ 14 ॥
prājñaḥ prājñapatiḥ sūryaḥ savitā viṣṇuraṃśumān || 14 ||
वे पर और अपर को जानने वाले हैं, तरणि हैं, अंशुमाली हैं, मनोहर हैं। वे प्राज्ञ हैं, प्राज्ञों के पति हैं, सूर्य हैं, सविता हैं, विष्णु हैं और अंशुमान् हैं। AI
পতঙ্গঃ পতগঃ স্থাণুর্বিহঙ্গো বিহগো বরঃ ॥ 15 ॥
pataṅgaḥ patagaḥ sthāṇurvihaṅgo vihago varaḥ || 15 ||
वे सदागति हैं, गन्धवह हैं, विहित हैं, विधि हैं, आशुग हैं। वे पतंग हैं, पतग हैं, स्थाणु हैं, विहंग हैं, विहग हैं और वर हैं। AI
ত্র্যম্বকঃ সর্বদমনো ভাবিতাত্মা ভিষগ্বরঃ ॥ 16 ॥
tryambakaḥ sarvadamano bhāvitātmā bhiṣagvaraḥ || 16 ||
वे हर्यश्व हैं, हरिताश्व हैं, हरिदश्व हैं, जगत के प्रिय हैं। वे त्र्यम्बक हैं, सर्वदमन हैं, भावितात्मा हैं और भिषग्वर (वैद्यों में श्रेष्ठ) हैं। AI
কালঃ কল্পান্তকো বহ্নিস্তপনঃ সম্প্রতাপনঃ ॥ 17 ॥
kālaḥ kalpāntako vahnistapanaḥ sampratāpanaḥ || 17 ||
आलोककृत् (प्रकाश करने वाला), लोकनाथ (लोकों का स्वामी), लोकालोकनमस्कृत (लोक और अलोक द्वारा नमस्कृत), काल (समय), कल्पान्तक (कल्प के अन्त करने वाला), वह्नि (अग्नि), तपन (तपाने वाला), सम्प्रतापन (भलीभाँति तपाने वाला) ॥ 17 ॥ AI
সহস্ররশ্মির্মিহিরো বিবিধাম্বরভূষণঃ ॥ 18 ॥
sahasraraśmirmihiro vividhāmbarabhūṣaṇaḥ || 18 ||
विलोचन (सुन्दर नेत्रों वाला), विरूपाक्ष (विषम नेत्रों वाला), सहस्राक्ष (हज़ार नेत्रों वाला), पुरन्दर (पुरों का विनाश करने वाला), सहस्ररश्मि (हज़ार किरणों वाला), मिहिर (सूर्य), विविधाम्बरभूषण (विविध वस्त्रों से भूषित) ॥ 18 ॥ AI
শ্রীমানশিশিরো বাগ্মী শ্রীপতিঃ শ্রীনিকেতনঃ ॥ 19 ॥
śrīmānaśiśiro vāgmī śrīpatiḥ śrīniketanaḥ || 19 ||
खग (आकाश में गमन करने वाला), प्रतर्दन (विदारण करने वाला), धन्य (धन्य), हयग (घोड़ों पर जाने वाला), वाग्विशारद (वाणी में कुशल), श्रीमान् (श्रीयुक्त), अशिशिर (शीतरहित), वाग्मी (वाक्पटु), श्रीपति (श्री के स्वामी), श्रीनिकेतन (श्री का निवास) ॥ 19 ॥ AI
কামচারী মহামাযো মহোগ্রোঽবিদিতামযঃ ॥ 20 ॥
kāmacārī mahāmāyo mahogro'viditāmayaḥ || 20 ||
श्रीकण्ठ (श्री के कण्ठ वाला), श्रीधर (श्री को धारण करने वाला), श्रीमान् (श्रीयुक्त), श्रीनिवास (श्री का निवास), वसुप्रद (धन देने वाला), कामचारी (इच्छानुसार चलने वाला), महामाय (महान माया वाला), महोग्र (अत्यन्त उग्र), अविदितामय (जिसके रोग अज्ञात/दूर हैं, रोगरहित) ॥ 20 ॥ AI
কীর্তিঃ কীর্তিকরো নিত্যঃ কুণ্ডলী কবচী রথী ॥ 21 ॥
kīrtiḥ kīrtikaro nityaḥ kuṇḍalī kavacī rathī || 21 ||
तीर्थक्रियावान् (तीर्थों के कार्य करने वाला), सुनय (अच्छी नीति वाला), विभक्त (विभाजित), भक्तवत्सल (भक्तों पर स्नेह करने वाला), कीर्ति (कीर्ति), कीर्तिकर (कीर्ति करने वाला), नित्य (नित्य), कुण्डली (कुण्डल धारण करने वाला), कवची (कवच धारण करने वाला), रथी (रथ पर सवार) ॥ 21 ॥ AI
বুদ্ধিমানমরশ্রেষ্ঠো রোচিষ্ণুঃ পাকশাসনঃ ॥ 22 ॥
buddhimānamaraśreṣṭho rociṣṇuḥ pākaśāsanaḥ || 22 ||
हिरण्यरेताः (स्वर्णमय वीर्य वाला), सप्ताश्व (सात घोड़ों वाला), प्रयतात्मा (शुद्ध आत्मा वाला), परन्तप (शत्रुओं को तपाने वाला), बुद्धिमान् (बुद्धिमान), अमरश्रेष्ठ (देवताओं में श्रेष्ठ), रोचिष्णु (दीप्तिमान), पाकशासन (पाक का शासन करने वाला) ॥ 22 ॥ AI
তমোঘ্নো ধ্বান্তহা বহ্নির্হোতাঽন্তঃকরণো গুহঃ ॥ 23 ॥
tamoghno dhvāntahā vahnirhotā'ntaḥkaraṇo guhaḥ || 23 ||
समुद्र (समुद्र), धनद (धन देने वाला), धाता (धारण करने वाला), मान्धाता (मान्धाता), कश्मलापह (कल्मष को हरने वाला), तमोघ्न (तम को नष्ट करने वाला), ध्वान्तहा (अन्धकार का नाश करने वाला), वह्नि (अग्नि), होता (होता), अन्तःकरण (अन्तःकरण), गुह (गुह्य) ॥ 23 ॥ AI
নিত্যোঽদিতো নিত্যরথঃ সুরেশঃ সুরপূজিতঃ ॥ 24 ॥
nityo'dito nityarathaḥ sureśaḥ surapūjitaḥ || 24 ||
पशुमान् (पशुओं से युक्त), प्रयतानन्द (शुद्ध आनन्द वाला), भूतेश (भूतों का स्वामी), श्रीमतां वर (श्रीमानों में श्रेष्ठ), नित्य (नित्य), अदित (अखण्डित), नित्यरथ (नित्य रथ वाला), सुरेश (देवताओं का स्वामी), सुरपूजित (देवताओं द्वारा पूजित) ॥ 24 ॥ AI
জীবানন্দো নিত্যগামী বিজেতা বিজযপ্রদঃ ॥ 25 ॥
jīvānando nityagāmī vijetā vijayapradaḥ || 25 ||
जो अजेय है, जो विजित है, जो विजेता है, जो चर और अचर रूपों में स्थित है, जो जीवों के आनंदस्वरूप है, जो नित्य गमन करने वाला है, जो विशेष रूप से विजयी है और जो विजय प्रदान करने वाला है। AI
প্রদ্যোতনো রথারূঢঃ সর্বলোকপ্রকাশকঃ ॥ 26 ॥
pradyotano rathārūḍhaḥ sarvalokaprakāśakaḥ || 26 ||
जो मेघस्वरूप है, जो अग्नि है, जो स्थिति है, जो स्थिर रहने योग्य है, जो वृद्ध है, जो निरंजन (निर्मल) है, जो प्रकाशमान है, जो रथ पर आरूढ़ है और जो समस्त लोकों को प्रकाशित करने वाला है। AI
সৃষ্টিকর্তা ক্রিযাহেতুর্মার্তণ্ডো মরুতাং পতিঃ ॥ 27 ॥
sṛṣṭikartā kriyāheturmārtaṇḍo marutāṃ patiḥ || 27 ||
जो ध्रुव (स्थिर) है, जो मेष राशि का स्वामी है, जो महावीर्यवान है, जो हंसस्वरूप है, जो संसार से तारने वाला है, जो सृष्टि का कर्ता है, जो क्रिया का कारण है, जो मार्तंड है और जो मरुतों का पति है। AI
বরুণেশো জগন্নাথঃ কৃতকৃত্যঃ সুলোচনঃ ॥ 28 ॥
varuṇeśo jagannāthaḥ kṛtakṛtyaḥ sulocanaḥ || 28 ||
जो मरुत्वान है, जो दहन (अग्नि) है, जो त्वष्टा है, जो भग है, जो भर्ग है, जो अर्यमा है, जो कपि है, जो वरुण के स्वामी हैं, जो जगन्नाथ हैं, जो कृतकृत्य हैं और जो सुलोचन (सुंदर नेत्रों वाले) हैं। AI
অসঙ্গগামী তিগ্মাংশুর্ধর্মাংশুর্দীপ্তদীধিতিঃ ॥ 29 ॥
asaṅgagāmī tigmāṃśurdharmāṃśurdīptadīdhitiḥ || 29 ||
जो विवस्वान है, जो भानुमान है, जो कार्यस्वरूप है, जो कारण है, जो तेज का निधि है, जो असङ्ग होकर गमन करने वाला है, जो तीक्ष्ण किरणों वाला है, जो धर्म की किरणों वाला है और जो दीप्त किरणों वाला है। AI
গভস্তিমান্ দীধিতিমান্ স্রগ্বী মণিকুলদ্যুতিঃ ॥ 30 ॥
gabhastimān dīdhitimān sragvī maṇikuladyutiḥ || 30 ||
जो सहस्र किरणों वाला है, जो ब्रध्न है, जो सहस्र अंशुओं वाला है, जो दिवाकर है, जो गभस्तिमान (किरणों वाला) है, जो दीधितिमान (प्रकाशमान) है, जो माला धारण करने वाला है और जो मणियों के समूह के समान कांति वाला है। AI
সুরজ্যেষ্ঠঃ সুরপতির্বহুজ্ঞো বচসাং পতিঃ ॥ 31 ॥
surajyeṣṭhaḥ surapatirbahujño vacasāṃ patiḥ || 31 ||
जो भास्कर है, जो देवताओं के कार्य को जानने वाला है, जो सर्वज्ञ है, जो तीक्ष्ण किरणों वाला है, जो देवताओं में श्रेष्ठ है, जो देवताओं का पति है, जो बहुत जानने वाला है और जो वाणी का स्वामी है। AI
অহিমানূর্জিতো ধীমানামুক্তঃ কীর্তিবর্ধনঃ ॥ 32 ॥
ahimānūrjito dhīmānāmuktaḥ kīrtivardhanaḥ || 32 ||
जो तेज का निधि है, जो महान तेज वाला है, जो महान कीर्ति वाला है, जो बृहस्पति है, जो अहि (सर्प/राहु) के समान मान वाला है, जो ऊर्जित (बलवान) है, जो धीमान (बुद्धिमान) है, जो आमुक्त (पूर्णतः मुक्त) है और जो कीर्ति को बढ़ाने वाला है। AI
তীব্রপ্রতাপনস্তাপী তাপনো বিশ্বতাপনঃ ॥ 33 ॥
tīvrapratāpanastāpī tāpano viśvatāpanaḥ || 33 ||
महान वैद्य, गणपति, धनेश, गणनायक, तीव्र प्रताप वाले, ताप देने वाले, तापने वाले और विश्व को तपाने वाले। AI
পদ্মনাভোঽমৃতাহারঃ স্থিতিমান্ কেতুমান্ নভঃ ॥ 34 ॥
padmanābho'mṛtāhāraḥ sthitimān ketumān nabhaḥ || 34 ||
स्वर्ण के समान कांतिमान, हृषीकेश, पद्मानंद, अत्यंत आनंदित, पद्मनाभ, अमृत का आहार करने वाले, स्थिति वाले, केतु वाले और आकाश। AI
আমুক্তকবচো বাগ্মী কঞ্চুকী বিশ্বভাবনঃ ॥ 35 ॥
āmuktakavaco vāgmī kañcukī viśvabhāvanaḥ || 35 ||
जिनका आदि और अंत नहीं, अच्युत, विश्व, विश्वामित्र, घृणि, विराट, मुक्त कवच वाले, वाग्मी, कंचुकी और विश्व के भावन करने वाले। AI
বিগাহী বেণুরসহঃ সমাযুক্তঃ সমাক্রতুঃ ॥ 36 ॥
vigāhī veṇurasahaḥ samāyuktaḥ samākratuḥ || 36 ||
बिना कारण गति वाले, श्रेष्ठ, शरण देने वाले, सब ओर मुख वाले, गहराई में प्रवेश करने वाले, वेणु के रस को सहन करने वाले, समायुक्त और समान क्रतु वाले। AI
প্রণতার্তিহরো বাযুঃ সিদ্ধকার্যো জনেশ্বরঃ ॥ 37 ॥
praṇatārtiharo vāyuḥ siddhakāryo janeśvaraḥ || 37 ||
धर्म के केतु, धर्म में रति रखने वाले, संहार करने वाले, संयम, यम, प्रणत जनों की पीड़ा हरने वाले, वायु, सिद्ध कार्य करने वाले और जनों के ईश्वर। AI
হারী হরির্হরো বাযুরৃতুঃ কালানলদ্যুতিঃ ॥ 38 ॥
hārī harirharo vāyurṛtuḥ kālānaladyutiḥ || 38 ||
आकाश में विचरण करने वाले, सत्य, सविता, आत्मा, मनोहर, हारी, हरि, हर, वायु, ऋतु और कालानल के समान द्युति वाले। AI
মহেন্দ্রো বিষ্টুতঃ স্তোত্রং স্তুতিহেতুঃ প্রভাকরঃ ॥ 39 ॥
mahendro viṣṭutaḥ stotraṃ stutihetuḥ prabhākaraḥ || 39 ||
सुख से सेवन करने योग्य, महातेजस्वी, जगत का एकमात्र कारण, महेंद्र, विष्टुत, स्तोत्र, स्तुति के हेतु और प्रभाकर। AI
ব্যাধিহা সুখদঃ সৌখ্যং কল্যাণঃ কলতাং বরঃ ॥ 40 ॥
vyādhihā sukhadaḥ saukhyaṃ kalyāṇaḥ kalatāṃ varaḥ || 40 ||
सहस्र किरणों वाले, आयुष्मान, क्रोध रहित, सुख देने वाले, सुखी, व्याधि का नाश करने वाले, सुख देने वाले, सौख्य, कल्याण और कला में श्रेष्ठ। AI
হিরণ্যরেতা আরোগ্যং বিদ্বান্ ব্রধ্নো বুধো মহান্ ॥ 41 ॥
hiraṇyaretā ārogyaṃ vidvān bradhno budho mahān || 41 ||
आरोग्य के कारण, सिद्धि, ऋद्धि, वृद्धि और बृहस्पति; स्वर्ण के समान रेतोवाला, आरोग्यस्वरूप, विद्वान, ब्रध्न, बुध और महान्। AI
সর্বপ্রিযঃ সর্বসহঃ সর্বশত্রুবিনাশনঃ ॥ 42 ॥
sarvapriyaḥ sarvasahaḥ sarvaśatruvināśanaḥ || 42 ||
प्राणवान, धैर्यवान, घर्म (ताप/गर्मी), घर्म करनेवाला, रुचि प्रदान करनेवाला; सबका प्रिय, सब कुछ सहनेवाला और सब शत्रुओं का नाश करनेवाला। AI
কেযূরী ভূষণোদ্ভাসী ভাসিতো ভাসনোঽনলঃ ॥ 43 ॥
keyūrī bhūṣaṇodbhāsī bhāsito bhāsano'nalaḥ || 43 ||
उन्नत, विद्योतन, द्योत, सहस्र किरणोंवाला, कृती; केयूरी, भूषणों से उद्भासित, भासित, भासन और अनल (अग्नि)। AI
সর্বদ্যোতো ভবদ্যোতঃ সর্বদ্যুতিকরো মতঃ ॥ 44 ॥
sarvadyoto bhavadyotaḥ sarvadyutikaro mataḥ || 44 ||
शरण देनेवाला, आर्ति (दुःख) हरनेवाला, होता, खद्योत, पक्षियों में श्रेष्ठ; सबका द्योत, भवद्योत, सब द्युति करनेवाला और मत। AI
কল্যাণকৃত্ কল্যবপুঃ সর্বকল্যাণভাজনম্ ॥ 45 ॥
kalyāṇakṛt kalyavapuḥ sarvakalyāṇabhājanam || 45 ||
कल्याणस्वरूप, कल्याण करनेवाला, कल्य, कल्य करनेवाला, कवि; कल्याण करनेवाला, कल्यवपु और सब कल्याण का भाजन। AI
উদারকর্মা সুনযঃ সুবর্চা বর্চসোজ্জ্বলঃ ॥ 46 ॥
udārakarmā sunayaḥ suvarcā varcasojjvalaḥ || 46 ||
शांति का प्रिय, प्रसन्न आत्मावाला, प्रशांत, प्रशम का प्रिय; उदार कर्मवाला, सुनय, सुवर्चा और वर्चस् से उज्ज्वल। AI
তেজস্বী সুযশা বর্ষ্মী বর্ণাধ্যক্ষো বলিপ্রিযঃ ॥ 47 ॥
tejasvī suyaśā varṣmī varṇādhyakṣo balipriyaḥ || 47 ||
वर्चस्वी, वर्चस् का ईश, तीनों लोकों का ईश, वश के अनुगामी; तेजस्वी, सुयश, वर्ष्मी, वर्णों का अध्यक्ष और बलि का प्रिय। AI
আকাশগঃ শীঘ্রগতিরাশুগো গতিমান্ খগঃ ॥ 48 ॥
ākāśagaḥ śīghragatirāśugo gatimān khagaḥ || 48 ||
यशस्वी, तेज का निलय, तेजस्वी, प्रकृति में स्थित; आकाश में गमन करनेवाला, शीघ्रगति, आशुग, गतिमान और खग। AI
জনিতা প্রজনো জীবো দীপঃ সর্বপ্রকাশকঃ ॥ 49 ॥
janitā prajano jīvo dīpaḥ sarvaprakāśakaḥ || 49 ||
गायों के स्वामी, ग्रहों के देवताओं के ईश्वर, गो-धन से युक्त, अकेले, प्रभंजन (वायु के समान वेगशाली), जन्म देने वाले, प्रजा को उत्पन्न करने वाले, जीव, दीप, सबको प्रकाशित करने वाले ॥ 49 ॥ AI
রক্ষোঘ্নো বিঘ্নশমনঃ কিরীটী সুমনঃপ্রিযঃ ॥ 50 ॥
rakṣoghno vighnaśamanaḥ kirīṭī sumanaḥpriyaḥ || 50 ||
सबके साक्षी, योग में नित्य स्थित, आकाश में विचरने वाले, असुरों का नाश करने वाले, राक्षसों का वध करने वाले, विघ्नों को शांत करने वाले, मुकुटधारी, सुमन (देवताओं) के प्रिय ॥ 50 ॥ AI
শিষ্টাচারঃ শুভাচারঃ স্বচারাচারতত্পরঃ ॥ 51 ॥
śiṣṭācāraḥ śubhācāraḥ svacārācāratatparaḥ || 51 ||
किरणों की माला से युक्त, सुमति (उत्तम बुद्धि वाले), जिनका विशेष रूप से प्रसिद्ध नाम है, शिष्ट आचरण वाले, शुभ आचरण वाले, अपने आचरण में तत्पर रहने वाले ॥ 51 ॥ AI
সুবিশিষ্টো বিশিষ্টাত্মা বিধেযো জ্ঞানশোভনঃ ॥ 52 ॥
suviśiṣṭo viśiṣṭātmā vidheyo jñānaśobhanaḥ || 52 ||
मंदार (कल्पवृक्ष), माठर, वेणु, भूख को दूर करने वाले, पृथ्वी के स्वामी, गुरु, अति विशिष्ट, विशिष्ट आत्मा वाले, आदरणीय, ज्ञान से शोभित ॥ 52 ॥ AI
সর্ববেদপ্রগীতাত্মা সর্ববেদলযো মহান্ ॥ 53 ॥
sarvavedapragītātmā sarvavedalayo mahān || 53 ||
महाश्वेत, प्रिय, जानने योग्य, सामगान गाने वाले, मोक्ष देने वाले, सब वेदों में गाए गए आत्मा वाले, सब वेदों में लीन, महान् ॥ 53 ॥ AI
ক্রিযাবানসিতো জিষ্ণুর্বরীযাংশুর্বরপ্রদঃ ॥ 54 ॥
kriyāvānasito jiṣṇurvarīyāṃśurvarapradaḥ || 54 ||
वेदमूर्ति, चारों वेदों वाले, वेदों को धारण करने वाले, वेदों के पारगामी, क्रियाशील, असित (काला/श्याम), जिष्णु (विजयी), अत्यंत श्रेष्ठ, वर देने वाले ॥ 54 ॥ AI
অলঙ্কারাক্ষরো বেদ্যো বিদ্যাবান্ বিদিতাশযঃ ॥ 55 ॥
alaṅkārākṣaro vedyo vidyāvān viditāśayaḥ || 55 ||
व्रत का पालन करने वाले, व्रत धारण करने वाले, लोकों के बंधु, अलंकृत, अलंकारों के अक्षर (स्वरूप) वाले, जानने योग्य, विद्यावान्, जिनका आशय जाना गया है ॥ 55 ॥ AI
চক্রপাণির্ধ্বজধরঃ সুরেশো লোকবত্সলঃ ॥ 56 ॥
cakrapāṇirdhvajadharaḥ sureśo lokavatsalaḥ || 56 ||
आकार (स्वरूप) वाले, भूषण, भूषित (अलंकृत), भूषण करने वाले, भुवनों में पूजित, हाथ में चक्र धारण करने वाले, ध्वजा धारण करने वाले, देवताओं के ईश्वर, लोकों के वत्सल ॥ 56 ॥ AI
অন্ধকারাপহঃ শ্রেষ্ঠো যুগাবর্তো যুগাদিকৃত্ ॥ 57 ॥
andhakārāpahaḥ śreṣṭho yugāvarto yugādikṛt || 57 ||
वाणी का स्वामी, महाबाहु, प्रकृति, विकृति, गुण, अंधकार का नाश करने वाला, श्रेष्ठ, युगों का आवर्तन करने वाला और युग के आदि का कर्ता। AI
শুভপ্রদঃ শুভঃ শাস্তা শুভকর্মা শুভপ্রদঃ ॥ 58 ॥
śubhapradaḥ śubhaḥ śāstā śubhakarmā śubhapradaḥ || 58 ||
अप्रमेय, सदा योग में स्थित, निरहंकार, ईश्वर, शुभ देने वाला, शुभ, शास्ता, शुभ कर्म करने वाला और शुभ देने वाला। AI
বলভৃদ্বলদো বন্ধুর্মতিমান্ বলিনাং বরঃ ॥ 59 ॥
balabhṛdbalado bandhurmatimān balināṃ varaḥ || 59 ||
सत्यवान, श्रुतिमान, उच्चैस्, नकार, वृद्धि देने वाला, अनल, बल धारण करने वाला, बल देने वाला, बंधु, मतिमान और बलवानों में श्रेष्ठ। AI
সংবত্সর ঋতুর্নেতা কালচক্রপ্রবর্তকঃ ॥ 60 ॥
saṃvatsara ṛturnetā kālacakrapravartakaḥ || 60 ||
अनंग, नागराजों के इंद्र, पद्मयोनि, गणेश्वर, संवत्सर, ऋतु, नेता और कालचक्र को प्रवर्तित करने वाला। AI
সুমূর্তিঃ সুমতিঃ সোমো গোবিন্দো জগদাদিজঃ ॥ 61 ॥
sumūrtiḥ sumatiḥ somo govindo jagadādijaḥ || 61 ||
कमल के समान नेत्रों वाला, पद्मयोनि, प्रभावान्, अमर, प्रभु, सुमूर्ति, सुमति, सोम, गोविंद और जगत के आदि में उत्पन्न होने वाला। AI
অতীন্দ্রিযোঽনেকরূপঃ স্কন্দঃ পরপুরঞ্জযঃ ॥ 62 ॥
atīndriyo'nekarūpaḥ skandaḥ parapurañjayaḥ || 62 ||
पीत वस्त्र धारण करने वाला, कृष्ण वस्त्र धारण करने वाला, दिग्वासा, इंद्रियों से परे, अतींद्रिय, अनेक रूपों वाला, स्कंद और शत्रु के परम पुर (नगर) को जीतने वाला। AI
সর্বদর্শী জিতাদর্শো দুঃস্বপ্নাশুভনাশনঃ ॥ 63 ॥
sarvadarśī jitādarśo duḥsvapnāśubhanāśanaḥ || 63 ||
शक्तिमान, जल को धारण करने वाला, भास्वान, मोक्ष का हेतु, अयोनिज, सबको देखने वाला, जितादर्श, दुःस्वप्न और अशुभ का नाश करने वाला। AI
স্পষ্টাক্ষরো মহামন্ত্রো বিশাখো যজনপ্রিযঃ ॥ 64 ॥
spaṣṭākṣaro mahāmantro viśākho yajanapriyaḥ || 64 ||
मंगल करने वाला, तरणि, वेगवान, कल्मष (पाप) का नाश करने वाला, स्पष्ट अक्षरों वाला, महामंत्र, विशाख और यज्ञ में प्रिय। AI
বিচক্ষণো দক্ষ ইন্দ্রঃ প্রত্যূষঃ প্রিযদর্শনঃ ॥ 65 ॥
vicakṣaṇo dakṣa indraḥ pratyūṣaḥ priyadarśanaḥ || 65 ||
विश्वकर्मा, महाशक्ति, द्युति, ईश, विहंगम, विचक्षण, दक्ष, इन्द्र, प्रत्यूष और प्रियदर्शन। AI
প্রভাকরো জিতরিপুঃ সুজনোঽরুণসারথিঃ ॥ 66 ॥
prabhākaro jitaripuḥ sujano'ruṇasārathiḥ || 66 ||
अखिन्न, वेदनिलय, वेदविद्, विदिताशय, प्रभाकर, जितरिपु, सुजन और अरुणसारथि। AI
গ্রহরাজো গ্রহপতির্গ্রহনক্ষত্রমণ্ডলঃ ॥ 67 ॥
graharājo grahapatirgrahanakṣatramaṇḍalaḥ || 67 ||
कुनाशी, सुरत, स्कन्द, महित, अभिमत, गुरु, ग्रहराज, ग्रहपति और ग्रहनक्षत्रमण्डल। AI
মঙ্গলোঽথ মঙ্গলবান্ মাঙ্গল্যো মঙ্গলাবহঃ ॥ 68 ॥
maṅgalo'tha maṅgalavān māṅgalyo maṅgalāvahaḥ || 68 ||
भास्कर, सततानन्द, नन्दन, नरवाहन, मंगल, मंगलवान्, मांगल्य और मंगलावह। AI
চতুর্মুখঃ পদ্মমালী পূতাত্মা প্রণতার্তিহা ॥ 69 ॥
caturmukhaḥ padmamālī pūtātmā praṇatārtihā || 69 ||
मांगल्यचारुचरित, शीर्ण, सर्वव्रत, व्रती, चतुर्मुख, पद्ममाली, पूतात्मा और प्रणतार्तिहा। AI
সম্পূর্ণঃ পুণ্ডরীকাক্ষো বিধেযো যোগতত্পরঃ ॥ 70 ॥
sampūrṇaḥ puṇḍarīkākṣo vidheyo yogatatparaḥ || 70 ||
अकिंचन, सतामीश, निर्गुण, गुणवान्, शुचि, सम्पूर्ण, पुण्डरीकाक्ष, विधेय और योगतत्पर। AI
সুবাহনো মাল্যদামা কৃতাহারো হরিপ্রিযঃ ॥ 71 ॥
suvāhano mālyadāmā kṛtāhāro haripriyaḥ || 71 ||
सहस्रांशु, क्रतुमति, सर्वज्ञ, सुमति, सुवाक्, सुवाहन, माल्यदामा, कृताहार और हरिप्रिय। AI
শতবিন্দুঃ শতমুখো গরীযাননলপ্রভঃ ॥ 72 ॥
śatavinduḥ śatamukho garīyānanalaprabhaḥ || 72 ||
ब्रह्मा, प्रचेता, प्रथित, प्रयतात्मा, स्थिरात्मक, शतविन्दु, शतमुख, गरीयान् और अनलप्रभ। AI
বিদ্যারাজাধিরাজো হি বিদ্যাবান্ ভূতিদঃ স্থিতঃ ॥ 73 ॥
vidyārājādhirājo hi vidyāvān bhūtidaḥ sthitaḥ || 73 ||
धीर, महान, विप्र, पुराण पुरुषों में उत्तम, विद्या के राजाओं के अधिराज, विद्यावान, भूति (समृद्धि) देने वाला और स्थित। AI
স্বঃস্থিতঃ সুরথঃ স্বর্ণো মোক্ষদো বলিকেতনঃ ॥ 74 ॥
svaḥsthitaḥ surathaḥ svarṇo mokṣado baliketanaḥ || 74 ||
जिसका शरीर अवर्णनीय है, श्रीमान, पापरहित, अत्यंत मंगलमय, स्वर्ग में स्थित, सुरथ, स्वर्ण, मोक्ष देने वाला और बलि का केतन (ध्वज)। AI
দযালুঃ সূক্ষ্মধীঃ ক্ষান্তিঃ ক্ষেমাক্ষেমস্থিতিপ্রিযঃ ॥ 75 ॥
dayāluḥ sūkṣmadhīḥ kṣāntiḥ kṣemākṣemasthitipriyaḥ || 75 ||
द्वंद्वरहित, द्वंद्व का नाश करने वाला, स्वर्ग, सर्वव्यापी, सबको प्रकाशित करने वाला, दयालु, सूक्ष्म बुद्धि वाला, क्षमा, तथा क्षेम और अक्षेम की स्थिति का प्रिय। AI
মহাবরাহঃ প্রিযকৃদ্দাতা ভোক্তাঽভযপ্রদঃ ॥ 76 ॥
mahāvarāhaḥ priyakṛddātā bhoktā'bhayapradaḥ || 76 ||
पृथ्वी को धारण करने वाला, भूमिपति, वक्ता, पवित्र आत्मा, त्रिलोचन, महावराह, प्रिय करने वाला, दाता, भोक्ता और अभय देने वाला। AI
চতুর্বেদধরোঽচিন্ত্যো বিনিন্দ্যো বিবিধাশনঃ ॥ 77 ॥
caturvedadharo'cintyo vinindyo vividhāśanaḥ || 77 ||
चक्रवर्ती, धृति करने वाला, सम्पूर्ण, महेश्वर, चारों वेदों को धारण करने वाला, अचिन्त्य, निंदारहित और विविध भोजन वाला। AI
সর্বোদধিস্থিতিকরঃ স্থিতিস্থেযঃ স্থিতিপ্রিযঃ ॥ 78 ॥
sarvodadhisthitikaraḥ sthitistheyaḥ sthitipriyaḥ || 78 ||
विचित्र रथ वाला, एकाकी, सात सप्ति (घोड़ों) वाला, परात्पर, सब समुद्रों की स्थिति करने वाला, स्थिति में स्थित रहने वाला और स्थिति का प्रिय। AI
পশুমান্ বাসবস্বামী বসুধামা বসুপ্রদঃ ॥ 79 ॥
paśumān vāsavasvāmī vasudhāmā vasupradaḥ || 79 ||
निष्कल, पुष्कल, विभु, वसुमान, वासव का प्रिय, पशुमान, वासव का स्वामी, वसुधामा और वसु देने वाला। AI
সঙ্কল্পযোনির্দিনকৃদ্ভগবান্ কারণাপহঃ ॥ 80 ॥
saṅkalpayonirdinakṛdbhagavān kāraṇāpahaḥ || 80 ||
बलवान, ज्ञानवान, तत्त्व, ओंकार, तीनों में स्थित, संकल्प का योनि, दिन को प्रकाशित करने वाला, भगवान और कारण का अपहरण करने वाला। AI
বষট্কারোদ্গাতা হোতা স্বাহাকারো হুতাহুতিঃ ॥ 81 ॥
vaṣaṭkārodgātā hotā svāhākāro hutāhutiḥ || 81 ||
नीलकण्ठ, धन के अधिपति, चारों वेदों को प्रिय वचन बोलने वाला, वषट्कार का उच्चारण करने वाला, होता, स्वाहाकार और हुत हवि — ये सब वही हैं। AI
সন্দেহনাশনো বাযুর্ধন্বী সুরনমস্কৃতঃ ॥ 82 ॥
sandehanāśano vāyurdhanvī suranamaskṛtaḥ || 82 ||
जनार्दन, जनों को आनन्द देने वाला, नर, नारायण, मेघ के समान, संदेह का नाश करने वाला, वायु, धनुषधारी और देवताओं द्वारा नमस्कृत। AI
দ্যুতিমান্ দ্যোতনো বিদ্যুদ্বিদ্যাবান্ বিদিতো বলী ॥ 83 ॥
dyutimān dyotano vidyudvidyāvān vidito balī || 83 ||
विग्रहधारी, निर्मल, बिन्दु, शोकरहित, निर्मल कान्ति वाला, कान्तिमान, प्रकाश करने वाला, विद्युत् के समान, विद्या से युक्त, विदित और बलवान। AI
সাবিত্রীভাবিতো রাজা বিশ্বামিত্রো ঘৃণির্বিরাট্ ॥ 84 ॥
sāvitrībhāvito rājā viśvāmitro ghṛṇirvirāṭ || 84 ||
घर्म (गर्मी) देने वाला, हिम (शीत) देने वाला, हास, कृष्ण मार्ग वाला, पुत्र को जीतने वाला, सावित्री द्वारा भावित, राजा, विश्वामित्र, घृणि और विराट। AI
সম্পূর্ণোঽথ জগন্নাথঃ সুমনাঃ শোভনপ্রিযঃ ॥ 85 ॥
sampūrṇo'tha jagannāthaḥ sumanāḥ śobhanapriyaḥ || 85 ||
सात अर्चियों (किरणों) वाला, सात घोड़ों वाला, सातों लोकों द्वारा नमस्कृत, सम्पूर्ण, जगन्नाथ, सुमनस् और शोभन (सुन्दर) को प्रिय। AI
সুমেধা মেধিকো মেধ্যো মেধাবী মধুসূদনঃ ॥ 86 ॥
sumedhā medhiko medhyo medhāvī madhusūdanaḥ || 86 ||
सर्वात्मा, सबका कर्ता, सृष्टि, सप्ति (घोड़ों) वाला, सप्तमी को प्रिय, सुमेधा, मेधिक, मेध्य, मेधावी और मधुसूदन। AI
সুখী সুখপ্রদঃ সৌখ্যঃ কান্তিঃ কান্তিপ্রিযো মুনিঃ ॥ 87 ॥
sukhī sukhapradaḥ saukhyaḥ kāntiḥ kāntipriyo muniḥ || 87 ||
अङ्गिरा के पति, कालज्ञ, धूमकेतु, सुकेतन, सुखी, सुख देने वाला, सौख्य, कान्ति, कान्ति को प्रिय और मुनि। AI
উমাপতিঃ সহস্রাংশুঃ প্রিযকারী প্রিযঙ্করঃ ॥ 88 ॥
umāpatiḥ sahasrāṃśuḥ priyakārī priyaṅkaraḥ || 88 ||
सन्ताप देने वाला, तपाने वाला, आतप, तपस्वियों का पति, उमापति, सहस्र किरणों वाला, प्रिय करने वाला और प्रियङ्कर। AI
জগত্পিতা প্রীতমনাঃ সর্বঃ খর্বো গুহোঽচলঃ ॥ 89 ॥
jagatpitā prītamanāḥ sarvaḥ kharvo guho'calaḥ || 89 ||
प्रीति, क्रोधरहित, जल से उत्पन्न होने वाला, खंजन पक्षी, जगतों का स्वामी, जगत का पिता, प्रसन्न मन वाला, सब कुछ, छोटा, गुह्य, अचल। AI
শ্রেযঃ শ্রেযস্করো জ্যাযান্ মহানুত্তম উদ্ভবঃ ॥ 90 ॥
śreyaḥ śreyaskaro jyāyān mahānuttama udbhavaḥ || 90 ||
सर्वव्यापी, जगत को आनंद देने वाला, जगत का नेता, देवताओं के शत्रुओं का नाश करने वाला, कल्याण, कल्याण करने वाला, अत्यंत बड़ा, महान, उत्तम, उद्भव। AI
ধরাধ্যক্ষো ধর্মরাজো ধর্মাধর্মপ্রবর্তকঃ ॥ 91 ॥
dharādhyakṣo dharmarājo dharmādharmapravartakaḥ || 91 ||
उत्तम, मेरु पर्वत के समान जानने योग्य, धारण करने वाला, पृथ्वी को धारण करने वाला, पृथ्वी का अधिक्षक, धर्मराज, धर्म और अधर्म को प्रवृत्त करने वाला। AI
উত্তরোঽনুত্তরস্তাপী অবাক্পতিরপাং পতিঃ ॥ 92 ॥
uttaro'nuttarastāpī avākpatirapāṃ patiḥ || 92 ||
रथ का अधिक्षक, रथ की गति, तरुण, गर्जन करने वाला, अग्नि, उत्तर, जिसका कोई उत्तर नहीं, ताप देने वाला, वाक्पति (वाणी का स्वामी), जलों का स्वामी। AI
স্বর্ভানুর্বিগতানন্দো বিশিষ্টোত্কৃষ্টকর্মকৃত্ ॥ 93 ॥
svarbhānurvigatānando viśiṣṭotkṛṣṭakarmakṛt || 93 ||
पुण्य का संकीर्तन करने वाला, पुण्यमय, हेतु, तीनों लोकों का आश्रय, स्वर्भानु (राहु), आनंद से रहित, विशिष्ट और उत्कृष्ट कर्म करने वाला। AI
একরথো রথাধীশঃ পিতা শনৈশ্চরস্য হি ॥ 94 ॥
ekaratho rathādhīśaḥ pitā śanaiścarasya hi || 94 ||
व्याधि का नाश करने वाला, क्षेम, शूर, सबको जीतने वालों में श्रेष्ठ, एक रथ वाला, रथ का स्वामी, शनैश्चर का पिता। AI
প্রলম্বহারসঞ্চারী প্রদ্যোতো দ্যোতিতানলঃ ॥ 95 ॥
pralambahārasañcārī pradyoto dyotitānalaḥ || 95 ||
वैवस्वत के गुरु, मृत्यु, धर्म में नित्य स्थित, महाव्रत, प्रलंब नामक दैत्य का हार करने वाला और संचार करने वाला, प्रद्योत, प्रकाशित अग्नि वाला। AI
শ্রেষ্ঠাত্মা সুপ্রিযঃ শম্ভুর্মরুতামীশ্বরেশ্বরঃ ॥ 96 ॥
śreṣṭhātmā supriyaḥ śambhurmarutāmīśvareśvaraḥ || 96 ||
संताप को हरने वाला, पर, मंत्र, मंत्रमूर्ति, महाबल, श्रेष्ठ आत्मा, अत्यंत प्रिय, शंभु, मरुतों के ईश्वर का भी ईश्वर। AI
সপ্তজিহ্বঃ সহস্রার্চী রত্নগর্ভোঽপরাজিতঃ ॥ 97 ॥
saptajihvaḥ sahasrārcī ratnagarbho'parājitaḥ || 97 ||
संसार की गति को जानने वाला, चेतना स्वरूप, संसार-सागर से पार कराने वाला, सात जिह्वाओं वाला, सहस्र किरणों वाला, रत्नगर्भ और अपराजित। AI
লোকসাক্ষী লোকগুরুর্লোকেশশ্চণ্ডবাহনঃ ॥ 98 ॥
lokasākṣī lokagururlokeśaścaṇḍavāhanaḥ || 98 ||
धर्म की ध्वजा वाला, अमेय आत्मा वाला, धर्म और अधर्म का वर देने वाला, लोकों का साक्षी, लोकों का गुरु, लोकों का ईश्वर और चण्डवाहन। AI
পিনাকধৃঙ্মহোত্সাহো মহামাযো মহাশনঃ ॥ 99 ॥
pinākadhṛṅmahotsāho mahāmāyo mahāśanaḥ || 99 ||
धर्मरूपी यूप, यूपरूपी वृक्ष, हाथ में धनुष धारण करने वाला, धनुर्धर, पिनाक धारण करने वाला, महान उत्साह वाला, महामाया वाला और महाशन। AI
জ্ঞানগম্যো দুরারাধ্যো লোহিতাঙ্গো বিবর্ধনঃ ॥ 100 ॥
jñānagamyo durārādhyo lohitāṅgo vivardhanaḥ || 100 ||
वीर, शक्तिमानों में श्रेष्ठ, सभी शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, ज्ञान से प्राप्त होने वाला, कठिनाई से आराध्य, लोहित अंगों वाला और बढ़ाने वाला। AI
ভগবানাত্মবান্ মন্ত্রস্ত্র্যক্ষরো নীললোহিতঃ ॥ 101 ॥
bhagavānātmavān mantrastryakṣaro nīlalohitaḥ || 101 ||
आकाश में गमन करने वाला, अंधकार रूप, धर्म देने वाला, नित्य, धर्म करने वाला, चित्रविक्रम, भगवान, आत्मवान, मन्त्र, तीन अक्षरों वाला और नीललोहित। AI
শার্ঙ্গধন্বাঽনলো ভীমঃ সর্বপ্রহরণাযুধঃ ॥ 102 ॥
śārṅgadhanvā'nalo bhīmaḥ sarvapraharaṇāyudhaḥ || 102 ||
एक, अनेक, त्रयी, काल, सविता, समिति को जीतने वाला, शार्ङ्ग नामक धनुष धारण करने वाला, अग्नि, भीम और सभी प्रहरणों को आयुध रूप में धारण करने वाला। AI
বদান্যো বাসুকির্বৈদ্য আত্রেযোঽথ পরাক্রমঃ ॥ 103 ॥
vadānyo vāsukirvaidya ātreyo'tha parākramaḥ || 103 ||
सुकर्मा, परमेष्ठी, नाकपाली, दिवि स्थित, वदान्य, वासुकि, वैद्य, आत्रेय और पराक्रम। AI
উদীচ্যবেষো মুকুটী পদ্মহস্তো হিমাংশুভৃত্ ॥ 104 ॥
udīcyaveṣo mukuṭī padmahasto himāṃśubhṛt || 104 ||
द्वापर, परम उदार, परम, ब्रह्मचर्यवान, उदीच्य वेष वाला, मुकुटी, हाथ में कमल धारण करने वाला और हिमांशु को धारण करने वाला। AI
সাযং দিবা দিব্যবপুরনির্দেশ্যো মহালযঃ ॥ 105 ॥
sāyaṃ divā divyavapuranirdeśyo mahālayaḥ || 105 ||
वे श्वेत वर्ण के हैं, प्रसन्न मुख वाले हैं, उनका मुख कमल के भीतरी भाग के समान है। वे रात्रि और दिन में दिव्य शरीर धारण करते हैं, वे अवर्णनीय हैं और महान आश्रय हैं। AI
ধৃতাতপত্রপ্রতিমো বিমর্ষী নির্ণযঃ স্থিতঃ ॥ 106 ॥
dhṛtātapatrapratimo vimarṣī nirṇayaḥ sthitaḥ || 106 ||
वे महान रथ वाले हैं, महान स्वामी हैं, वे शेष हैं तथा सत्त्व, रज और तम — ये तीनों गुण उन्हीं के हैं। वे धारण किए हुए छत्र के समान हैं, वे विचारक हैं, निर्णयस्वरूप हैं और स्थित हैं। AI
সর্বদো ধনদো মোক্ষো বিহারী বহুদাযকঃ ॥ 107 ॥
sarvado dhanado mokṣo vihārī bahudāyakaḥ || 107 ||
वे अहिंसक हैं, शुद्ध बुद्धि वाले हैं, अद्वितीय हैं और सबका वर्धन करने वाले हैं। वे सबको देने वाले हैं, धन देने वाले हैं, मोक्षस्वरूप हैं, विहार करने वाले हैं और बहुत कुछ देने वाले हैं। AI
মনোহরবপুঃ শুভ্রঃ শোভনঃ সুপ্রভাবনঃ ॥ 108 ॥
manoharavapuḥ śubhraḥ śobhanaḥ suprabhāvanaḥ || 108 ||
वे सुंदर हैं, रात्रि को हरने वाले हैं, स्वामी हैं, भगवान हैं, सर्वव्यापी हैं और अविनाशी हैं। उनका शरीर मनोहर है, वे शुभ्र हैं, शोभायमान हैं और उत्तम प्रभाव वाले हैं। AI
রাজ্ঞীপ্রিযঃ শব্দকরো গ্রহেশস্তিমিরাপহঃ ॥ 109 ॥
rājñīpriyaḥ śabdakaro graheśastimirāpahaḥ || 109 ||
वे उत्तम प्रभाव वाले हैं, उत्तम पराक्रम वाले हैं, सुंदर नेत्रों वाले हैं और दिशाओं तथा विदिशाओं के स्वामी हैं। वे रानी के प्रिय हैं, शब्द उत्पन्न करने वाले हैं, ग्रहों के स्वामी हैं और अंधकार को दूर करने वाले हैं। AI
চতুর্ভুজো মহাযোগী যোগীশ্বরপতিস্তথা ॥ 110 ॥
caturbhujo mahāyogī yogīśvarapatistathā || 110 ||
वे सिंहिका के पुत्र (राहु) के शत्रु हैं, देव हैं, वरदान देने वाले हैं, श्रेष्ठ नायक हैं। वे चतुर्भुज हैं, महायोगी हैं और योगीश्वरों के भी स्वामी हैं। AI
জগত্প্রদীপো বিস্তীর্ণো মহাবিস্তীর্ণমণ্ডলঃ ॥ 111 ॥
jagatpradīpo vistīrṇo mahāvistīrṇamaṇḍalaḥ || 111 ||
उनका रूप अनादि है, वे अदिति से उत्पन्न हुए हैं, उनकी कांति रत्न के समान है और वे प्रकाशमय हैं। वे जगत के दीपक हैं, विस्तीर्ण हैं और उनका मंडल महान विस्तार वाला है। AI
নিরালম্বো গগনগো ধর্মকর্মপ্রভাবকৃত্ ॥ 112 ॥
nirālambo gaganago dharmakarmaprabhāvakṛt || 112 ||
उनका रथ एक चक्र वाला है, उनका रथ स्वर्ण का है और वे स्वर्ण के शरीर को धारण करते हैं। वे निरालंब हैं, आकाश में गमन करने वाले हैं और धर्म तथा कर्म के प्रभाव को उत्पन्न करने वाले हैं। AI
মেরুসেবী সুমেধাবী মেরুরক্ষাকরো মহান্ ॥ 113 ॥
merusevī sumedhāvī merurakṣākaro mahān || 113 ||
धर्मात्मा, कर्मों के साक्षी, प्रत्यक्ष रूप में विद्यमान परमेश्वर, मेरु पर्वत की सेवा करने वाले, अत्यंत बुद्धिमान, मेरु की रक्षा करने वाले और महान। AI
পাপসন্তাপহর্তা চ মনোবাঞ্ছিতদাযকঃ ॥ 114 ॥
pāpasantāpahartā ca manovāñchitadāyakaḥ || 114 ||
आधारभूत, रति (प्रेम/आनंद) से युक्त, तथा धन और धान्य को प्रदान करने वाले, पाप और संताप को हरने वाले और मन की इच्छाओं को पूर्ण करने वाले। AI
কালত্রযানন্তরূপো মুনিবৃন্দনমস্কৃতঃ ॥ 115 ॥
kālatrayānantarūpo munivṛndanamaskṛtaḥ || 115 ||
रोगों को हरने वाले, राज्य देने वाले, रमणीय गुणों वाले, ऋण से मुक्त, तीनों कालों में अनंत रूप वाले और मुनियों के समूह द्वारा नमस्कृत। AI
সাম্রাজ্যদাননিরতঃ সমারাধনতোষবান্ ॥ 116 ॥
sāmrājyadānanirataḥ samārādhanatoṣavān || 116 ||
संध्या के समय लालिमा (राग) उत्पन्न करने वाले, सिद्ध, संध्या-वंदन में वंदित, साम्राज्य देने में तत्पर और सम्यक् आराधना से प्रसन्न होने वाले। AI
ভযাপহর্তা ভগবানপ্রমেযপরাক্রমঃ ।
মনুস্বামী মনুপতির্মান্যো মন্বন্তরাধিপঃ ॥ 117 ॥
bhayāpahartā bhagavānaprameyaparākramaḥ |
manusvāmī manupatirmānyo manvantarādhipaḥ || 117 ||
भक्तों के दुःख का नाश करने वाले, भवसागर से पार करने वाले, भय को हरने वाले, भगवान, अप्रमेय पराक्रम वाले, मनु के स्वामी, मनुओं के पति, मान्य और मन्वंतर के अधिपति। AI
এতত্তে সর্বমাখ্যাতং যন্মাং ত্বং পরিপৃচ্ছসি ।
নাম্নাং সহস্রং সবিতুঃ পরাশর্যো যদাহ মে ॥ 1 ॥
etatte sarvamākhyātaṃ yanmāṃ tvaṃ paripṛcchasi |
nāmnāṃ sahasraṃ savituḥ parāśaryo yadāha me || 1 ||
फलश्रुति। जो तुम मुझसे पूछ रहे हो, वह सब मैंने तुमसे कह दिया; सविता (सूर्य) के नामों का सहस्र (नाम-समूह) जो पराशर के पुत्र ने मुझे बताया था। AI
বন্ধমোক্ষকরং চৈব ভানোর্নামানুকীর্তনাত্ ॥ 2 ॥
bandhamokṣakaraṃ caiva bhānornāmānukīrtanāt || 2 ||
भानु (सूर्य) के नामों का कीर्तन करने से यह (स्तोत्र) धन्य, यश देने वाला, आयु बढ़ाने वाला, दुःख और बुरे स्वप्नों का नाश करने वाला तथा बंधन से मोक्ष देने वाला है। AI
অক্ষযং সুখমন্নাদ্যং ভবেত্তস্যোপসাধিতম্ ॥ 3 ॥
akṣayaṃ sukhamannādyaṃ bhavettasyopasādhitam || 3 ||
जो मनुष्य इसको नित्य सुनता है या संयमपूर्वक पढ़ता है, उसके लिए अक्षय सुख और अन्न-आदि उपलब्ध हो जाते हैं। AI
বিজযী চ ভবেন্নিত্যমাশ্রযং পরমাপ্নুযাত্ ॥ 4 ॥
vijayī ca bhavennityamāśrayaṃ paramāpnuyāt || 4 ||
राजा, अग्नि और चोर का भय न हो, तथा रोग का भय भी न हो। वह सदा विजयी हो और परम आश्रय को प्राप्त करे। AI
জীবেদ্বর্ষশতাযুশ্চ সর্বব্যাধিবিবর্জিতঃ ॥ 5 ॥
jīvedvarṣaśatāyuśca sarvavyādhivivarjitaḥ || 5 ||
वह कीर्तिमान, सुंदर, विद्वान, सुखी और प्रियदर्शन हो; सौ वर्ष की आयु जिए और सब रोगों से रहित हो। AI
প্রাতঃ শুচির্নিযমবান্ সুসমৃদ্ধিযুক্তঃ ।
দূরেণ তং পরিহরন্তি সদৈব রোগাঃ
ভূতাঃ সুপর্ণমিব সর্বমহোরগেন্দ্রাঃ ॥ 6 ॥
prātaḥ śucirniyamavān susamṛddhiyuktaḥ |
dūreṇa taṃ pariharanti sadaiva rogāḥ
bhūtāḥ suparṇamiva sarvamahoragendrāḥ || 6 ||
जो प्रातःकाल शुद्ध और नियमयुक्त होकर सूर्य के इन नामों के सहस्र का पाठ करता है, वह अच्छी समृद्धि से युक्त होता है; रोग उससे सदा दूर रहते हैं, जैसे गरुड़ से सब बड़े सर्प दूर रहते हैं। AI