Shani (Saturn)

शनि चालीसा

Shani Chalisa

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🖋️ Script: मराठी ▾
Meaning —
दोहा
dohā
जय गणेश गिरिजा सुवन, मङ्गल करण कृपाल ।
jaya gaṇeśa girijā suvana, maṅgala karaṇa kṛpāla |
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥
dīnana ke dukha dūra kari, kījai nātha nihāla ||
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
jaya jaya śrī śanideva prabhu, sunahu vinaya mahārāja |
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥
karahu kṛpā he ravi tanaya, rākhahu jana kī lāja ||
चौपाई
caupāī
जयति जयति शनिदेव दयाला ।
jayati jayati śanideva dayālā |
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
karata sadā bhaktana pratipālā ||
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै ।
cāri bhujā, tanu śyāma virājai |
माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
māthe ratana mukuṭa chavi chājai ||
परम विशाल मनोहर भाला ।
parama viśāla manohara bhālā |
टेढई दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
ṭeḍhaī dṛṣṭi bhṛkuṭi vikarālā ||
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके ।
kuṇḍala śravaṇa camācama camake |
हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥
hiye māla muktana maṇi damake ||
कर में गदा त्रिशूल कुठारा ।
kara meṃ gadā triśūla kuṭhārā |
पल बिच करैं आरिहिं संहारा ॥
pala bica karaiṃ ārihiṃ saṃhārā ||
पिङ्गल, कृष्णों, छाया, नन्दन ।
piṅgala, kṛṣṇoṃ, chāyā, nandana |
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भञ्जन॥
yama, koṇastha, raudra, dukha bhañjana||
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा ।
saurī, manda, śani, daśa nāmā |
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
bhānu putra pūjahiṃ saba kāmā ||
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीम् ।
jā para prabhu prasanna hai jāhīm |
रङ्कहुं राव करैङ्क्षण माहीम् ॥
raṅkahuṃ rāva karaiṅkṣaṇa māhīm ||
पर्वतहू तृण होई निहारत ।
parvatahū tṛṇa hoī nihārata |
तृण हू को पर्वत करि डारत॥
tṛṇa hū ko parvata kari ḍārata||
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो ।
rāja milata bana rāmahiṃ dīnho |
कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों॥
kaikeihuṃ kī mati hari līnhoṃ||
बनहूं में मृग कपट दिखाई ।
banahūṃ meṃ mṛga kapaṭa dikhāī |
मातु जानकी गी चतुराई॥
mātu jānakī gī caturāī||
लखनहिं शक्ति विकल करि डारा ।
lakhanahiṃ śakti vikala kari ḍārā |
मचिगा दल में हाहाकारा॥
macigā dala meṃ hāhākārā||
रावण की गति-मति बौराई ।
rāvaṇa kī gati-mati baurāī |
रामचन्द्र सों बैर बढई॥
rāmacandra soṃ baira baḍhaī||
दियो कीट करि कञ्चन लङ्का ।
diyo kīṭa kari kañcana laṅkā |
बजि बजरङ्ग बीर की डङ्का॥
baji bajaraṅga bīra kī ḍaṅkā||
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा ।
nṛpa vikrama para tuhi pagu dhārā |
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
citra mayūra nigali gai hārā||
हार नौलाखा लाग्यो चोरी ।
hāra naulākhā lāgyo corī |
हाथ पैर डरवायो तोरी॥
hātha paira ḍaravāyo torī||
भारी दशा निकृष्ट दिखायो ।
bhārī daśā nikṛṣṭa dikhāyo |
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
telihiṃ ghara kolhū calavāyo||
विनय राग दीपक महं कीन्होम् ।
vinaya rāga dīpaka mahaṃ kīnhom |
तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों॥
taba prasanna prabhu hai sukha dīnhoṃ||
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी ।
hariścandra nṛpa nāri bikānī |
आपहुं भरे डोम घर पानी॥
āpahuṃ bhare ḍoma ghara pānī||
तैसे नल परदशा सिरानी ।
taise nala paradaśā sirānī |
भूञ्जी-मीन कूद गी पानी॥
bhūñjī-mīna kūda gī pānī||
श्री शङ्करहि गहयो जब जाई ।
śrī śaṅkarahi gahayo jaba jāī |
पार्वती को सती कराई॥
pārvatī ko satī karāī||
तनिक विलोकत ही करि रीसा ।
tanika vilokata hī kari rīsā |
नभ उडि़ गयो गौरिसुत सीसा॥
nabha uḍi़ gayo gaurisuta sīsā||
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी ।
pāṇḍava para bhai daśā tumhārī |
बची द्रौपदी होति उघारी॥
bacī draupadī hoti ughārī||
कौरव के भी गति मति मारयो ।
kaurava ke bhī gati mati mārayo |
युद्घ महाभारत करि डारयो॥
yudgha mahābhārata kari ḍārayo||
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला ।
ravi kahaṃ mukha mahaṃ dhari tatkālā |
लेकर कूदि परयो पाताला ॥
lekara kūdi parayo pātālā ||
शेष देव-लखि विनती लाई ।
śeṣa deva-lakhi vinatī lāī |
रवि को मुख ते दियो छुडई ॥
ravi ko mukha te diyo chuḍaī ||
वाहन प्रभु के सात सुजाना ।
vāhana prabhu ke sāta sujānā |
जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥
jaga digja gardabha mṛga svānā ||
जम्बुक सिंह आदि नखधारी ।
jambuka siṃha ādi nakhadhārī |
सो फल जज्योतिष कहत पुकारी ॥
so phala jajyotiṣa kahata pukārī ||
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैम् ।
gaja vāhana lakṣmī gṛha āvaim |
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैम् ॥
haya te sukha sampatti upajāvaim ||
गर्दभ हानि करै बहु काजा ।
gardabha hāni karai bahu kājā |
गर्दभ सिद्घ कर राज समाजा ॥
gardabha sidgha kara rāja samājā ||
जम्बुक बुद्घि नष्ट कर डारै ।
jambuka budghi naṣṭa kara ḍārai |
मृग दे कष्ट प्रण संहारै ॥
mṛga de kaṣṭa praṇa saṃhārai ||
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी ।
jaba āvahiṃ prabhu svāna savārī |
चोरी आदि होय डर भारी ॥
corī ādi hoya ḍara bhārī ||
तैसहि चारि चरण यह नामा ।
taisahi cāri caraṇa yaha nāmā |
स्वर्ण लौह चाञ्जी अरु तामा ॥
svarṇa lauha cāñjī aru tāmā ||
लौह चरण पर जब प्रभु आवैम् ।
lauha caraṇa para jaba prabhu āvaim |
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥
dhana jana sampatti naṣṭa karāvai ||
समता ताम्र रजत शुभकारी ।
samatā tāmra rajata śubhakārī |
स्वर्ण सर्व सुख मङ्गल कारी ॥
svarṇa sarva sukha maṅgala kārī ||
जो यह शनि चरित्र नित गावै ।
jo yaha śani caritra nita gāvai |
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥
kabahuṃ na daśā nikṛṣṭa satāvai ||
अदभुत नाथ दिखावैं लीला ।
adabhuta nātha dikhāvaiṃ līlā |
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
karaiṃ śatru ke naśi bali ḍhīlā ||
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई ।
jo paṇḍita suyogya bulavāī |
विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई ॥
vidhivata śani graha śānti karāī ||
पीपल जल शनि दिवस चढावत ।
pīpala jala śani divasa caḍhāvata |
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
dīpa dāna dai bahu sukha pāvata ||
कहत रामसुन्दर प्रभु दासा ।
kahata rāmasundara prabhu dāsā |
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥
śani sumirata sukha hota prakāśā ||
दोहा
dohā
पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।
pāṭha śaniścara deva ko, kī hoṃ vimala taiyāra |
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥
karata pāṭha cālīsa dina, ho bhavasāgara pāra ||
Sanskrit — Devanagari (original)
दोहा
जय गणेश गिरिजा सुवन, मङ्गल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥
चौपाई
जयति जयति शनिदेव दयाला ।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै ।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला ।
टेढई दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके ।
हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा ।
पल बिच करैं आरिहिं संहारा ॥
पिङ्गल, कृष्णों, छाया, नन्दन ।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भञ्जन॥
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा ।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥
जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीम् ।
रङ्कहुं राव करैङ्क्षण माहीम् ॥
पर्वतहू तृण होई निहारत ।
तृण हू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो ।
कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों॥
बनहूं में मृग कपट दिखाई ।
मातु जानकी गी चतुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करि डारा ।
मचिगा दल में हाहाकारा॥
रावण की गति-मति बौराई ।
रामचन्द्र सों बैर बढई॥
दियो कीट करि कञ्चन लङ्का ।
बजि बजरङ्ग बीर की डङ्का॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा ।
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलाखा लाग्यो चोरी ।
हाथ पैर डरवायो तोरी॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो ।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्होम् ।
तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी ।
आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल परदशा सिरानी ।
भूञ्जी-मीन कूद गी पानी॥
श्री शङ्करहि गहयो जब जाई ।
पार्वती को सती कराई॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा ।
नभ उडि़ गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी ।
बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो ।
युद्घ महाभारत करि डारयो॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला ।
लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती लाई ।
रवि को मुख ते दियो छुडई ॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना ।
जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिंह आदि नखधारी ।
सो फल जज्योतिष कहत पुकारी ॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैम् ।
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैम् ॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा ।
गर्दभ सिद्घ कर राज समाजा ॥
जम्बुक बुद्घि नष्ट कर डारै ।
मृग दे कष्ट प्रण संहारै ॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी ।
चोरी आदि होय डर भारी ॥
तैसहि चारि चरण यह नामा ।
स्वर्ण लौह चाञ्जी अरु तामा ॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवैम् ।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥
समता ताम्र रजत शुभकारी ।
स्वर्ण सर्व सुख मङ्गल कारी ॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै ।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥
अदभुत नाथ दिखावैं लीला ।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई ।
विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई ॥
पीपल जल शनि दिवस चढावत ।
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥
कहत रामसुन्दर प्रभु दासा ।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥
दोहा
पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Devanagari script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
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