Goddess Durga

श्री दुर्गा चालीसा

Shri Durga Chalisa

✍️ Unknown author 📂 Chalisa 🖋️ Devanagari script 🔢 39 verses 93 views
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🖋️ Script: नेपाली ▾
Meaning —
Verse 1
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ 1 ॥
namo namo durge sukha karanī |
namo namo ambe duḥkha haranī || 1 ||
Verse 2
निरङ्कार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहू लोक फैली उजियारी ॥ 2 ॥
niraṅkāra hai jyoti tumhārī |
tihū loka phailī ujiyārī || 2 ||
Verse 3
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥
śaśi lalāṭa mukha mahāviśālā |
netra lāla bhṛkuṭi vikarālā || 3 ||
Verse 4
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥ 4 ॥
rūpa mātu ko adhika suhāve |
daraśa karata jana ati sukha pāve || 4 ||
Verse 5
तुम संसार शक्ति लय कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ 5 ॥
tuma saṃsāra śakti laya kīnā |
pālana hetu anna dhana dīnā || 5 ||
Verse 6
अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ 6 ॥
annapūrṇā huyi jaga pālā |
tuma hī ādi sundarī bālā || 6 ||
Verse 7
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिव शङ्कर प्यारी ॥ 7 ॥
pralayakāla saba nāśana hārī |
tuma gaurī śiva śaṅkara pyārī || 7 ||
Verse 8
शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम् ॥ 8 ॥
śiva yogī tumhare guṇa gāvem |
brahmā viṣṇu tumheṃ nita dhyāvem || 8 ||
Verse 9
रूप सरस्वती का तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ 9 ॥
rūpa sarasvatī kā tuma dhārā |
de subuddhi ṛṣi munina ubārā || 9 ||
Verse 10
धरा रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भयि फाड के खम्बा ॥ 10 ॥
dharā rūpa narasiṃha ko ambā |
paragaṭa bhayi phāḍa ke khambā || 10 ||
Verse 11
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ 11 ॥
rakṣā kara prahlāda bacāyo |
hiraṇyākṣa ko svarga paṭhāyo || 11 ||
Verse 12
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।
श्री नारायण अङ्ग समाहीम् ॥ 12 ॥
lakṣmī rūpa dharo jaga māhīm |
śrī nārāyaṇa aṅga samāhīm || 12 ||
Verse 13
क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥ 13 ॥
kṣīrasindhu meṃ karata vilāsā |
dayāsindhu dījai mana āsā || 13 ||
Verse 14
हिङ्गलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥ 14 ॥
hiṅgalāja meṃ tumhīṃ bhavānī |
mahimā amita na jāta bakhānī || 14 ||
Verse 15
मातङ्गी धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ 15 ॥
mātaṅgī dhūmāvati mātā |
bhuvaneśvarī bagalā sukhadātā || 15 ||
Verse 16
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ 16 ॥
śrī bhairava tārā jaga tāriṇī |
chinna bhāla bhava duḥkha nivāriṇī || 16 ||
Verse 17
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लाङ्गुर वीर चलत अगवानी ॥ 17 ॥
kehari vāhana soha bhavānī |
lāṅgura vīra calata agavānī || 17 ||
Verse 18
कर में खप्पर खडग विराजे ।
जाको देख काल डर भाजे ॥ 18 ॥
kara meṃ khappara khaḍaga virāje |
jāko dekha kāla ḍara bhāje || 18 ||
Verse 19
तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ 19 ॥
tohe kara meṃ astra triśūlā |
jāte uṭhata śatru hiya śūlā || 19 ||
Verse 20
नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँ लोक में डङ्का बाजत ॥ 20 ॥
nagarakoṭi meṃ tumhīṃ virājata |
tihu~ loka meṃ ḍaṅkā bājata || 20 ||
Verse 21
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शङ्खन संहारे ॥ 21 ॥
śumbha niśumbha dānava tuma māre |
raktabīja śaṅkhana saṃhāre || 21 ||
Verse 22
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥
mahiṣāsura nṛpa ati abhimānī |
jehi agha bhāra mahī akulānī || 22 ||
Verse 23
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ 23 ॥
rūpa karāla kālikā dhārā |
sena sahita tuma tihi saṃhārā || 23 ||
Verse 24
पडी भीढ सन्तन पर जब जब ।
भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ 24 ॥
paḍī bhīḍha santana para jaba jaba |
bhayi sahāya mātu tuma taba taba || 24 ||
Verse 25
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब कहें अशोका ॥ 25 ॥
amarapurī aru bāsava lokā |
taba mahimā saba kaheṃ aśokā || 25 ||
Verse 26
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ 26 ॥
jvālā meṃ hai jyoti tumhārī |
tumheṃ sadā pūjeṃ nara nārī || 26 ||
Verse 27
प्रेम भक्ति से जो यश गावेम् ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवेम् ॥ 27 ॥
prema bhakti se jo yaśa gāvem |
duḥkha dāridra nikaṭa nahiṃ āvem || 27 ||
Verse 28
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।
जन्म मरण ते सौं छुट जायि ॥ 28 ॥
dhyāve tumheṃ jo nara mana lāyi |
janma maraṇa te sauṃ chuṭa jāyi || 28 ||
Verse 29
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ 29 ॥
jogī sura muni kahata pukārī |
yoga na hoyi bina śakti tumhārī || 29 ||
Verse 30
शङ्कर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ 30 ॥
śaṅkara ācāraja tapa kīno |
kāma aru krodha jīta saba līno || 30 ||
Verse 31
निशिदिन ध्यान धरो शङ्कर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ 31 ॥
niśidina dhyāna dharo śaṅkara ko |
kāhu kāla nahiṃ sumiro tumako || 31 ||
Verse 32
शक्ति रूप को मरम न पायो ।
शक्ति गयी तब मन पछतायो ॥ 32 ॥
śakti rūpa ko marama na pāyo |
śakti gayī taba mana pachatāyo || 32 ||
Verse 33
शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥ 33 ॥
śaraṇāgata huyi kīrti bakhānī |
jaya jaya jaya jagadamba bhavānī || 33 ||
Verse 34
भयि प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दयि शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥ 34 ॥
bhayi prasanna ādi jagadambā |
dayi śakti nahiṃ kīna vilambā || 34 ||
Verse 35
मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ 35 ॥
moko mātu kaṣṭa ati ghero |
tuma bina kauna harai duḥkha mero || 35 ||
Verse 36
आशा तृष्णा निपट सतावेम् ।
रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैम् ॥ 36 ॥
āśā tṛṣṇā nipaṭa satāvem |
ripu mūrakha mòhi ati dara pāvaim || 36 ||
Verse 37
शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ 37 ॥
śatru nāśa kījai mahārānī |
sumirauṃ ikacita tumheṃ bhavānī || 37 ||
Verse 39
करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । 38 ॥
जब लगि जियू दया फल पावू ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनावू ॥ 39 ॥
karo kṛpā he mātu dayālā |
ṛddhi-siddhi de karahu nihālā | 38 ||
jaba lagi jiyū dayā phala pāvū |
tumharo yaśa maiṃ sadā sunāvū || 39 ||
Verse 40
दुर्गा चालीसा जो गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥ 40 ॥
durgā cālīsā jo gāvai |
saba sukha bhoga paramapada pāvai || 40 ||
देवीदास शरण निज जानी ।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
devīdāsa śaraṇa nija jānī |
karahu kṛpā jagadamba bhavānī ||
Sanskrit — Devanagari (original)
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ 1 ॥
निरङ्कार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहू लोक फैली उजियारी ॥ 2 ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥
रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥ 4 ॥
तुम संसार शक्ति लय कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ 5 ॥
अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ 6 ॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिव शङ्कर प्यारी ॥ 7 ॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम् ॥ 8 ॥
रूप सरस्वती का तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ 9 ॥
धरा रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भयि फाड के खम्बा ॥ 10 ॥
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ 11 ॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।
श्री नारायण अङ्ग समाहीम् ॥ 12 ॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥ 13 ॥
हिङ्गलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥ 14 ॥
मातङ्गी धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ 15 ॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ 16 ॥
केहरि वाहन सोह भवानी ।
लाङ्गुर वीर चलत अगवानी ॥ 17 ॥
कर में खप्पर खडग विराजे ।
जाको देख काल डर भाजे ॥ 18 ॥
तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ 19 ॥
नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँ लोक में डङ्का बाजत ॥ 20 ॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शङ्खन संहारे ॥ 21 ॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥
रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ 23 ॥
पडी भीढ सन्तन पर जब जब ।
भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ 24 ॥
अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब कहें अशोका ॥ 25 ॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ 26 ॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावेम् ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवेम् ॥ 27 ॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।
जन्म मरण ते सौं छुट जायि ॥ 28 ॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ 29 ॥
शङ्कर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ 30 ॥
निशिदिन ध्यान धरो शङ्कर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ 31 ॥
शक्ति रूप को मरम न पायो ।
शक्ति गयी तब मन पछतायो ॥ 32 ॥
शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥ 33 ॥
भयि प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दयि शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥ 34 ॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ 35 ॥
आशा तृष्णा निपट सतावेम् ।
रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैम् ॥ 36 ॥
शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ 37 ॥
करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । 38 ॥
जब लगि जियू दया फल पावू ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनावू ॥ 39 ॥
दुर्गा चालीसा जो गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥ 40 ॥
देवीदास शरण निज जानी ।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Devanagari script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
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