Goddess Saraswati

ಸರಸ್ವತೀ ಸ್ತೋತ್ರಮ್

Sarasvati Stotram

✍️ Unknown author 📂 Stotram 🖋️ Kannada script 🔢 21 verses 40 views
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Summary — Hindi
यह सरस्वती स्तोत्रम् देवी सरस्वती की स्तुति है, जिसमें उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शंकर आदि देवताओं द्वारा पूजित बताया गया है। स्तोत्र में देवी के रूप का वर्णन है—वे स्फटिक के समान चार भुजाओं वाली, श्वेत कमल, शुक और पुस्तक धारण करने वाली तथा कमलासन पर विराजमान हैं। इसमें बार-बार नमस्कार करते हुए देवी को विद्या, ज्ञान, वाग् और सिद्धियों की स्वरूपा कहा गया है। अंत में कहा गया है कि जो प्रतिदिन सायंकाल और प्रातःकाल इसका पाठ करता है, उसे छह महीनों में सिद्धि प्राप्त होती है, और पाठ करने वालों तथा सुनने वालों को चोर एवं व्याघ्र का भय नहीं होता। यह स्तोत्र अगस्त्य मुनि द्वारा कहा गया बताया गया है और इसे सब सिद्धियाँ देने वाला तथा सब पापों का नाश करने वाला कहा गया है।

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The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.

Meaning —
ಯಾ ಕುನ್ದೇನ್ದು ತುಷಾರಹಾರಧವಲಾ ಯಾ ಶುಭ್ರವಸ್ತ್ರಾವೃತಾ
ಯಾ ವೀಣಾವರದಣ್ಡಮಣ್ಡಿತಕರಾ ಯಾ ಶ್ವೇತಪದ್ಮಾಸನಾ ।
Verse 1
ಯಾ ಬ್ರಹ್ಮಾಚ್ಯುತ ಶಙ್ಕರಪ್ರಭೃತಿಭಿರ್ದೇವೈಸ್ಸದಾ ಪೂಜಿತಾ
ಸಾ ಮಾಂ ಪಾತು ಸರಸ್ವತೀ ಭಗವತೀ ನಿಶ್ಶೇಷಜಾಡ್ಯಾಪಹಾ ॥ 1 ॥
yā brahmācyuta śaṅkaraprabhṛtibhirdevaissadā pūjitā
sā māṃ pātu sarasvatī bhagavatī niśśeṣajāḍyāpahā || 1 ||

जो ब्रह्मा, विष्णु और शंकर आदि देवताओं द्वारा सदा पूजित हैं, वे भगवती सरस्वती, जो सम्पूर्ण जड़ता को हरने वाली हैं, मेरी रक्षा करें ॥ 1 ॥ AI

Verse 2
ದೋರ್ಭಿರ್ಯುಕ್ತಾ ಚತುರ್ಭಿಃ ಸ್ಫಟಿಕಮಣಿನಿಭೈ ರಕ್ಷಮಾಲಾನ್ದಧಾನಾ
ಹಸ್ತೇನೈಕೇನ ಪದ್ಮಂ ಸಿತಮಪಿಚ ಶುಕಂ ಪುಸ್ತಕಂ ಚಾಪರೇಣ ।
ಭಾಸಾ ಕುನ್ದೇನ್ದುಶಙ್ಖಸ್ಫಟಿಕಮಣಿನಿಭಾ ಭಾಸಮಾನಾzಸಮಾನಾ
ಸಾ ಮೇ ವಾಗ್ದೇವತೇಯಂ ನಿವಸತು ವದನೇ ಸರ್ವದಾ ಸುಪ್ರಸನ್ನಾ ॥ 2 ॥
dorbhiryuktā caturbhiḥ sphaṭikamaṇinibhai rakṣamālāndadhānā
hastenaikena padmaṃ sitamapica śukaṃ pustakaṃ cāpareṇa |
bhāsā kundenduśaṅkhasphaṭikamaṇinibhā bhāsamānāzsamānā
sā me vāgdevateyaṃ nivasatu vadane sarvadā suprasannā || 2 ||

जो स्फटिक मणि के समान चार भुजाओं से युक्त हैं, जो रक्षासूत्र की माला धारण करती हैं, एक हाथ में श्वेत कमल और दूसरे हाथ में शुक तथा पुस्तक लिए हुए हैं, जो कुंद पुष्प, चंद्रमा, शंख और स्फटिक मणि के समान कांति से प्रकाशमान हैं, वे मेरी वाग्देवी सदा अत्यंत प्रसन्न होकर मेरे मुख में निवास करें ॥ 2 ॥ AI

Verse 3
ಸುರಾಸುರೈಸ್ಸೇವಿತಪಾದಪಙ್ಕಜಾ ಕರೇ ವಿರಾಜತ್ಕಮನೀಯಪುಸ್ತಕಾ ।
ವಿರಿಞ್ಚಿಪತ್ನೀ ಕಮಲಾಸನಸ್ಥಿತಾ ಸರಸ್ವತೀ ನೃತ್ಯತು ವಾಚಿ ಮೇ ಸದಾ ॥ 3 ॥
surāsuraissevitapādapaṅkajā kare virājatkamanīyapustakā |
viriñcipatnī kamalāsanasthitā sarasvatī nṛtyatu vāci me sadā || 3 ||

जिनके चरण-कमलों की देवता और असुर सेवा करते हैं, जिनके हाथ में सुंदर पुस्तक विराजमान है, जो ब्रह्मा की पत्नी हैं और कमल के आसन पर विराजमान हैं, वे सरस्वती सदा मेरी वाणी में नृत्य करें ॥ 3 ॥ AI

Verse 4
ಸರಸ್ವತೀ ಸರಸಿಜಕೇಸರಪ್ರಭಾ ತಪಸ್ವಿನೀ ಸಿತಕಮಲಾಸನಪ್ರಿಯಾ ।
ಘನಸ್ತನೀ ಕಮಲವಿಲೋಲಲೋಚನಾ ಮನಸ್ವಿನೀ ಭವತು ವರಪ್ರಸಾದಿನೀ ॥ 4 ॥
sarasvatī sarasijakesaraprabhā tapasvinī sitakamalāsanapriyā |
ghanastanī kamalavilolalocanā manasvinī bhavatu varaprasādinī || 4 ||

जो सरस्वती कमल के केसर के समान कांति वाली हैं, तपस्विनी हैं, श्वेत कमल के आसन से प्रेम करने वाली हैं, जिनके स्तन घने हैं, जिनके नेत्र कमल में विचरण करने वाले हैं, वे मनस्विनी सरस्वती मुझे वरदान देने वाली हों ॥ 4 ॥ AI

Verse 5
ಸರಸ್ವತಿ ನಮಸ್ತುಭ್ಯಂ ವರದೇ ಕಾಮರೂಪಿಣಿ ।
ವಿದ್ಯಾರಮ್ಭಂ ಕರಿಷ್ಯಾಮಿ ಸಿದ್ಧಿರ್ಭವತು ಮೇ ಸದಾ ॥ 5 ॥
sarasvati namastubhyaṃ varade kāmarūpiṇi |
vidyārambhaṃ kariṣyāmi siddhirbhavatu me sadā || 5 ||

हे सरस्वती, आपको नमस्कार है, हे वरदायिनी, हे कामरूपिणी। मैं विद्या का आरम्भ करता हूँ, मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो ॥ 5 ॥ AI

Verse 6
ಸರಸ್ವತಿ ನಮಸ್ತುಭ್ಯಂ ಸರ್ವದೇವಿ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಶಾನ್ತರೂಪೇ ಶಶಿಧರೇ ಸರ್ವಯೋಗೇ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 6 ॥
sarasvati namastubhyaṃ sarvadevi namo namaḥ |
śāntarūpe śaśidhare sarvayoge namo namaḥ || 6 ||

हे सरस्वती, आपको नमस्कार है, हे सर्वदेवी, आपको बार-बार नमस्कार है। हे शांत रूप वाली, हे चंद्रमा को धारण करने वाली, हे सर्वयोग स्वरूपिणी, आपको बार-बार नमस्कार है ॥ 6 ॥ AI

Verse 7
ನಿತ್ಯಾನನ್ದೇ ನಿರಾಧಾರೇ ನಿಷ್ಕಲಾಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ।
ವಿದ್ಯಾಧರೇ ವಿಶಾಲಾಕ್ಷಿ ಶುದ್ಧಜ್ಞಾನೇ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 7 ॥
nityānande nirādhāre niṣkalāyai namo namaḥ |
vidyādhare viśālākṣi śuddhajñāne namo namaḥ || 7 ||

हे नित्य आनंद स्वरूपिणी, हे निराधार, हे निष्कल, आपको बार-बार नमस्कार है। हे विद्याधारिणी, हे विशाल नेत्रों वाली, हे शुद्ध ज्ञान स्वरूपिणी, आपको बार-बार नमस्कार है ॥ 7 ॥ AI

Verse 8
ಶುದ್ಧಸ್ಫಟಿಕರೂಪಾಯೈ ಸೂಕ್ಷ್ಮರೂಪೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಶಬ್ದಬ್ರಹ್ಮಿ ಚತುರ್ಹಸ್ತೇ ಸರ್ವಸಿದ್ಧ್ಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 8 ॥
śuddhasphaṭikarūpāyai sūkṣmarūpe namo namaḥ |
śabdabrahmi caturhaste sarvasiddhyai namo namaḥ || 8 ||

हे शुद्ध स्फटिक के समान रूप वाली, हे सूक्ष्म रूपिणी, आपको बार-बार नमस्कार है। हे शब्दब्रह्म स्वरूपिणी, हे चतुर्भुजा, हे सर्वसिद्धि स्वरूपिणी, आपको बार-बार नमस्कार है ॥ 8 ॥ AI

Verse 9
ಮುಕ್ತಾಲಙ್ಕೃತ ಸರ್ವಾಙ್ಗ್ಯೈ ಮೂಲಾಧಾರೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಮೂಲಮನ್ತ್ರಸ್ವರೂಪಾಯೈ ಮೂಲಶಕ್ತ್ಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 9 ॥
muktālaṅkṛta sarvāṅgyai mūlādhāre namo namaḥ |
mūlamantrasvarūpāyai mūlaśaktyai namo namaḥ || 9 ||

हे मोतियों से सुसज्जित सम्पूर्ण अंगों वाली देवी, मूलाधार में आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे मूल मंत्र के स्वरूप वाली देवी, हे मूल शक्ति, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 10
ಮನೋನ್ಮನಿ ಮಹಾಭೋಗೇ ವಾಗೀಶ್ವರಿ ನಮೋ ನಮಃ ।
ವಾಗ್ಮ್ಯೈ ವರದಹಸ್ತಾಯೈ ವರದಾಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 10 ॥
manonmani mahābhoge vāgīśvari namo namaḥ |
vāgmyai varadahastāyai varadāyai namo namaḥ || 10 ||

हे मनोन्मनि, हे महाभोग वाली देवी, हे वागीश्वरी, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे वाक्-स्वरूपा, हे वरद हस्त वाली देवी, हे वरदायिनी, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 11
ವೇದಾಯೈ ವೇದರೂಪಾಯೈ ವೇದಾನ್ತಾಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಗುಣದೋಷವಿವರ್ಜಿನ್ಯೈ ಗುಣದೀಪ್ತ್ಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 11 ॥
vedāyai vedarūpāyai vedāntāyai namo namaḥ |
guṇadoṣavivarjinyai guṇadīptyai namo namaḥ || 11 ||

हे वेद-स्वरूपा देवी, हे वेदरूपा, हे वेदांत-स्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे गुण और दोष से रहित देवी, हे गुणों से प्रकाशित होने वाली देवी, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 12
ಸರ್ವಜ್ಞಾನೇ ಸದಾನನ್ದೇ ಸರ್ವರೂಪೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಸಮ್ಪನ್ನಾಯೈ ಕುಮಾರ್ಯೈ ಚ ಸರ್ವಜ್ಞೇ ತೇ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 12 ॥
sarvajñāne sadānande sarvarūpe namo namaḥ |
sampannāyai kumāryai ca sarvajñe te namo namaḥ || 12 ||

हे सर्वज्ञान-स्वरूपा, हे सदानंद-स्वरूपा, हे सर्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे सम्पन्ना देवी, हे कुमारी, हे सर्वज्ञा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 13
ಯೋಗಾನಾರ್ಯ ಉಮಾದೇವ್ಯೈ ಯೋಗಾನನ್ದೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ದಿವ್ಯಜ್ಞಾನ ತ್ರಿನೇತ್ರಾಯೈ ದಿವ್ಯಮೂರ್ತ್ಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 13 ॥
yogānārya umādevyai yogānande namo namaḥ |
divyajñāna trinetrāyai divyamūrtyai namo namaḥ || 13 ||

हे योगानार्य, हे उमादेवी, हे योगानंद-स्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे दिव्य ज्ञान वाली त्रिनेत्रा देवी, हे दिव्य मूर्ति, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 14
ಅರ್ಧಚನ್ದ್ರಜಟಾಧಾರಿ ಚನ್ದ್ರಬಿಮ್ಬೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಚನ್ದ್ರಾದಿತ್ಯಜಟಾಧಾರಿ ಚನ್ದ್ರಬಿಮ್ಬೇ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 14 ॥
ardhacandrajaṭādhāri candrabimbe namo namaḥ |
candrādityajaṭādhāri candrabimbe namo namaḥ || 14 ||

हे अर्धचंद्र को जटा में धारण करने वाली देवी, हे चंद्रबिंब-स्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे चंद्र और सूर्य को जटा में धारण करने वाली देवी, हे चंद्रबिंब-स्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 15
ಅಣುರೂಪೇ ಮಹಾರೂಪೇ ವಿಶ್ವರೂಪೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಅಣಿಮಾದ್ಯಷ್ಟಸಿದ್ಧಾಯೈ ಆನನ್ದಾಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 15 ॥
aṇurūpe mahārūpe viśvarūpe namo namaḥ |
aṇimādyaṣṭasiddhāyai ānandāyai namo namaḥ || 15 ||

हे अणुरूपा, हे महारूपा, हे विश्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे अणिमा आदि आठ सिद्धियों वाली देवी, हे आनंद-स्वरूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 16
ಜ್ಞಾನ ವಿಜ್ಞಾನ ರೂಪಾಯೈ ಜ್ಞಾನಮೂರ್ತೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ನಾನಾಶಾಸ್ತ್ರ ಸ್ವರೂಪಾಯೈ ನಾನಾರೂಪೇ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 16 ॥
jñāna vijñāna rūpāyai jñānamūrte namo namaḥ |
nānāśāstra svarūpāyai nānārūpe namo namaḥ || 16 ||

हे ज्ञान और विज्ञान के स्वरूप वाली देवी, हे ज्ञानमूर्ति, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे नाना शास्त्रों के स्वरूप वाली देवी, हे नानारूपा, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 17
ಪದ್ಮಜಾ ಪದ್ಮವಂಶಾ ಚ ಪದ್ಮರೂಪೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಪರಮೇಷ್ಠ್ಯೈ ಪರಾಮೂರ್ತ್ಯೈ ನಮಸ್ತೇ ಪಾಪನಾಶಿನೀ ॥ 17 ॥
padmajā padmavaṃśā ca padmarūpe namo namaḥ |
parameṣṭhyai parāmūrtyai namaste pāpanāśinī || 17 ||

हे पद्म से उत्पन्न होने वाली, हे पद्मवंश में उत्पन्न होने वाली, हे कमल के समान रूप वाली, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे परमेष्ठी (ब्रह्मा) की अधिष्ठात्री, हे परम मूर्ति वाली, हे पापों का नाश करने वाली, आपको नमस्कार है। AI

Verse 18
ಮಹಾದೇವ್ಯೈ ಮಹಾಕಾಲ್ಯೈ ಮಹಾಲಕ್ಷ್ಮ್ಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಬ್ರಹ್ಮವಿಷ್ಣುಶಿವಾಯೈ ಚ ಬ್ರಹ್ಮನಾರ್ಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 18 ॥
mahādevyai mahākālyai mahālakṣmyai namo namaḥ |
brahmaviṣṇuśivāyai ca brahmanāryai namo namaḥ || 18 ||

हे महादेवी, हे महाकाली, हे महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे ब्रह्मा, विष्णु और शिव की स्वरूपा, तथा हे ब्रह्मनारी (ब्रह्मा की शक्ति), आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 19
ಕಮಲಾಕರಪುಷ್ಪಾ ಚ ಕಾಮರೂಪೇ ನಮೋ ನಮಃ ।
ಕಪಾಲಿಕರ್ಮದೀಪ್ತಾಯೈ ಕರ್ಮದಾಯೈ ನಮೋ ನಮಃ ॥ 19 ॥
kamalākarapuṣpā ca kāmarūpe namo namaḥ |
kapālikarmadīptāyai karmadāyai namo namaḥ || 19 ||

हे कमलाकर (कमल-समूह) के पुष्पों से युक्त, हे कामरूप वाली, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। हे कपालिक कर्म में दीप्त होने वाली, हे कर्म देने वाली, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। AI

Verse 20
ಸಾಯಂ ಪ್ರಾತಃ ಪಠೇನ್ನಿತ್ಯಂ ಷಣ್ಮಾಸಾತ್ಸಿದ್ಧಿರುಚ್ಯತೇ ।
ಚೋರವ್ಯಾಘ್ರಭಯಂ ನಾಸ್ತಿ ಪಠತಾಂ ಶೃಣ್ವತಾಮಪಿ ॥ 20 ॥
sāyaṃ prātaḥ paṭhennityaṃ ṣaṇmāsātsiddhirucyate |
coravyāghrabhayaṃ nāsti paṭhatāṃ śṛṇvatāmapi || 20 ||

जो प्रतिदिन सायंकाल और प्रातःकाल इसका पाठ करता है, छह महीनों में उसे सिद्धि प्राप्त होती है, ऐसा कहा जाता है। पाठ करने वालों और सुनने वालों को चोर तथा व्याघ्र का भय नहीं होता। AI

Verse 21
ಇತ್ಥಂ ಸರಸ್ವತೀ ಸ್ತೋತ್ರಮಗಸ್ತ್ಯಮುನಿ ವಾಚಕಮ್ ।
ಸರ್ವಸಿದ್ಧಿಕರಂ ನೄಣಾಂ ಸರ್ವಪಾಪಪ್ರಣಾಶನಮ್ ॥ 21 ॥
itthaṃ sarasvatī stotramagastyamuni vācakam |
sarvasiddhikaraṃ nṝṇāṃ sarvapāpapraṇāśanam || 21 ||

इस प्रकार अगस्त्य मुनि द्वारा कहे गए इस सरस्वती स्तोत्र को, जो मनुष्यों को सब सिद्धियाँ देने वाला और सब पापों का नाश करने वाला है। AI

Sanskrit — Devanagari (original)
या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युत शङ्करप्रभृतिभिर्देवैस्सदा पूजिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निश्शेषजाड्यापहा ॥ 1 ॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभै रक्षमालान्दधाना
हस्तेनैकेन पद्मं सितमपिच शुकं पुस्तकं चापरेण ।
भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाzसमाना
सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥ 2 ॥
सुरासुरैस्सेवितपादपङ्कजा करे विराजत्कमनीयपुस्तका ।
विरिञ्चिपत्नी कमलासनस्थिता सरस्वती नृत्यतु वाचि मे सदा ॥ 3 ॥
सरस्वती सरसिजकेसरप्रभा तपस्विनी सितकमलासनप्रिया ।
घनस्तनी कमलविलोललोचना मनस्विनी भवतु वरप्रसादिनी ॥ 4 ॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥ 5 ॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं सर्वदेवि नमो नमः ।
शान्तरूपे शशिधरे सर्वयोगे नमो नमः ॥ 6 ॥
नित्यानन्दे निराधारे निष्कलायै नमो नमः ।
विद्याधरे विशालाक्षि शुद्धज्ञाने नमो नमः ॥ 7 ॥
शुद्धस्फटिकरूपायै सूक्ष्मरूपे नमो नमः ।
शब्दब्रह्मि चतुर्हस्ते सर्वसिद्ध्यै नमो नमः ॥ 8 ॥
मुक्तालङ्कृत सर्वाङ्ग्यै मूलाधारे नमो नमः ।
मूलमन्त्रस्वरूपायै मूलशक्त्यै नमो नमः ॥ 9 ॥
मनोन्मनि महाभोगे वागीश्वरि नमो नमः ।
वाग्म्यै वरदहस्तायै वरदायै नमो नमः ॥ 10 ॥
वेदायै वेदरूपायै वेदान्तायै नमो नमः ।
गुणदोषविवर्जिन्यै गुणदीप्त्यै नमो नमः ॥ 11 ॥
सर्वज्ञाने सदानन्दे सर्वरूपे नमो नमः ।
सम्पन्नायै कुमार्यै च सर्वज्ञे ते नमो नमः ॥ 12 ॥
योगानार्य उमादेव्यै योगानन्दे नमो नमः ।
दिव्यज्ञान त्रिनेत्रायै दिव्यमूर्त्यै नमो नमः ॥ 13 ॥
अर्धचन्द्रजटाधारि चन्द्रबिम्बे नमो नमः ।
चन्द्रादित्यजटाधारि चन्द्रबिम्बे नमो नमः ॥ 14 ॥
अणुरूपे महारूपे विश्वरूपे नमो नमः ।
अणिमाद्यष्टसिद्धायै आनन्दायै नमो नमः ॥ 15 ॥
ज्ञान विज्ञान रूपायै ज्ञानमूर्ते नमो नमः ।
नानाशास्त्र स्वरूपायै नानारूपे नमो नमः ॥ 16 ॥
पद्मजा पद्मवंशा च पद्मरूपे नमो नमः ।
परमेष्ठ्यै परामूर्त्यै नमस्ते पापनाशिनी ॥ 17 ॥
महादेव्यै महाकाल्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ।
ब्रह्मविष्णुशिवायै च ब्रह्मनार्यै नमो नमः ॥ 18 ॥
कमलाकरपुष्पा च कामरूपे नमो नमः ।
कपालिकर्मदीप्तायै कर्मदायै नमो नमः ॥ 19 ॥
सायं प्रातः पठेन्नित्यं षण्मासात्सिद्धिरुच्यते ।
चोरव्याघ्रभयं नास्ति पठतां शृण्वतामपि ॥ 20 ॥
इत्थं सरस्वती स्तोत्रमगस्त्यमुनि वाचकम् ।
सर्वसिद्धिकरं नॄणां सर्वपापप्रणाशनम् ॥ 21 ॥
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Kannada script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
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