📚 Sri Mahanyasam

ਸ਼੍ਰੀ ਮਹਾਨ੍ਯਾਸਮ੍ - 5.1. ਹਂਸ ਗਾਯਤ੍ਰੀ

5.1. Hamsa Gayatri

✍️ Vedic (Apaurusheya) 📂 Mantra 📂 Puja Vidhi 🖋️ Gurmukhi script 🔢 4 verses 25 views
📄 Download PDF
View: Text in this script too →
🖋️ Script: ਪੰਜਾਬੀ ▾
⚠️ AI-generated translation — the Konkani meaning was produced by AI and automatically cross-checked against the Sanskrit, but it may still contain errors. It has not yet been reviewed by a scholar. Please refer to a traditional commentary for study.
Summary — Konkani
श्री महान्यासम् - 5.1. हंस गायत्रींत हंस हें बीज, हंसी ही शक्ती आनी हंसू हें कीलक अशें सांगलां. परमहंसाच्या प्रसादाच्या सिद्धीखातीर जपांत विनियोग केला. करन्यास आनी हृदयादि न्यास हंसां, हंसी, हंसूं, हंसैं, हंसौं आनी हंसः ह्या मंत्रांनी केल्यात. ध्यानांत हंस परमात्मरूपाक नमस्कार केला आनी देह देवालय, जीव सनातन देव अशें म्हणून सोऽहम् भावान पूजा करची अशें सांगलां. हंस हंस अशें जो म्हणटा तो हंस नाम सदाशिव, अशे तरेन न्यास विधी करून उपरांत सम्पुट सुरू करचो.

AI-generated · not yet verified

The Konkani meaning of each verse is shown below the verse.

⚠️ AI-generated translation — the Hindi meaning was produced by AI and automatically cross-checked against the Sanskrit, but it may still contain errors. It has not yet been reviewed by a scholar. Please refer to a traditional commentary for study.
Summary — Hindi
श्री महान्यासम् के 5.1 हंस गायत्री में हंसा को बीज, हंसी को शक्ति और हंसू को कीलक बताया गया है, तथा परमहंस की प्रसाद-सिद्धि के लिए जप में विनियोग कहा गया है। इसमें करन्यास और हृदयादि न्यास की विधि दी गई है, जिसमें अंगूठे से लेकर करतल-करपृष्ठ तक तथा हृदय से लेकर अस्त्र तक नमः, स्वाहा, वषट्, हुम्, वौषट् और फट् का प्रयोग है। ध्यान में हंस को गमन-आगमन में स्थित, गमन आदि से शून्य, चिद्रूप दीप और अंधकार हरने वाला कहा गया है। देह को देवालय और जीव को सनातन देव बताकर अज्ञानरूपी निर्माल्य त्यागकर सोऽहं भाव से पूजा करने का उपदेश दिया गया है। अंत में हंस गायत्री का जप और न्यास विधि करके संपुट आरंभ करने का कथन है।

AI-generated · not yet verified

The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.

Meaning —
ਅਸ੍ਯ ਸ਼੍ਰੀ ਹਂਸਗਾਯਤ੍ਰੀ ਮਹਾਮਨ੍ਤ੍ਰਸ੍ਯ, ਅਵ੍ਯਕ੍ਤ ਪਰਬ੍ਰਹ੍ਮ ऋषਿਃ,
ਅਨੁष੍ਟੁ-ਪ੍ਛਨ੍ਦਃ, ਪਰਮਹਂਸੋ ਦੇਵਤਾ ।
Mantra 1
ਹਂਸਾ-ਮ੍ਬੀਜਮ੍, ਹਂਸੀਂ ਸ਼ਕ੍ਤਿਃ । ਹਂਸੂ-ਙ੍ਕੀਲਕਮ੍ ।
ਪਰਮਹਂਸ ਪ੍ਰਸਾਦ ਸਿਦ੍ਧ੍ਯਰ੍ਥੇ ਜਪੇ ਵਿਨਿਯੋਗਃ ॥ 1
haṃsā-mbījam, haṃsīṃ śaktiḥ | haṃsū-ṅkīlakam |
paramahaṃsa prasāda siddhyarthe jape viniyogaḥ || 1

हंसा बीज है, हंसी शक्ति है। हंसू कीलक है। परमहंस की प्रसाद-सिद्धि के लिए जप में विनियोग है॥ 1 AI

हंस हें बीज, हंसी ही शक्ती. हंसू हें कीलक. परमहंसाच्या प्रसादाच्या सिद्धीखातीर जपांत विनियोग. AI

Mantra 4
ਕਰਨ੍ਯਾਸਃ -
ਹਂਸਾਂ ਅਗੁਂष੍ਠਾਭ੍ਯਾ-ਨ੍ਨਮਃ । ਹਂਸੀ-ਨ੍ਤਰ੍ਜਨੀਭ੍ਯਾ-ਨ੍ਨਮਃ ।
ਹਂਸੂਂ - ਮਦ੍ਧ੍ਯਮਾਭ੍ਯਾ-ਨ੍ਨਮਃ । ਹਂਸੈਂ - ਅਨਾਮਿਕਾਭ੍ਯਾ-ਨ੍ਨਮਃ ।
ਹਂਸੌਂ - ਕਨਿष੍ਠਿਕਾਭ੍ਯਾ-ਨ੍ਨਮਃ । ਹਂਸਃ-ਕਰਤਲ ਕਰਪृष੍ਠਾਭ੍ਯਾ-ਨ੍ਨਮਃ । 2
ਹृਦਯਾਦਿ ਨ੍ਯਾਸਃ -
ਹਂਸਾਂ - ਹृਦਯਾਯ ਨਮਃ । ਹਂਸੀਂ - ਸ਼ਿਰਸੇ ਸ੍ਵਾਹਾ ।
ਹਂਸੂਂ - ਸ਼ਿਖਾਯੈ ਵषਟ੍ । ਹਂਸੈਂ - ਕਵਚਾਯ ਹੁਮ੍ ।
ਹਂਸੌਂ - ਨੇਤ੍ਰਤ੍ਰਯਾਯ ਵੌषਟ੍ । ਹਂਸਃ - ਅਸ੍ਤ੍ਰਾਯ ਫਟ੍ ॥
ਓ-ਮ੍ਭੂਰ੍ਭੁਵ॒ਸ੍ਸੁਵ॒ਰੋਮਿਤਿ ਦਿਗ੍ਬਨ੍ਧਃ । 3
ਧ੍ਯਾਨਂ -
ਗਮਾਗਮਸ੍ਥ-ਙ੍ਗਮਨਾਦਿਸ਼ੂਨ੍ਯ-ਞ੍ਚਿ-ਦ੍ਰੂਪਦੀਪ-ਨ੍ਤਿਮਿਰਾਪਹਾਰਮ੍ ।
ਪਸ਼੍ਯਾਮਿ ਤੇ ਸਰ੍ਵਜਨਾਨ੍ਤਰਸ੍ਥ-ਨ੍ਨਮਾਮਿ ਹਂਸ-ਮ੍ਪਰਮਾਤ੍ਮਰੂਪਮ੍ ॥ 4
karanyāsaḥ -
haṃsāṃ aguṃṣṭhābhyā-nnamaḥ | haṃsī-ntarjanībhyā-nnamaḥ |
haṃsūṃ - maddhyamābhyā-nnamaḥ | haṃsaiṃ - anāmikābhyā-nnamaḥ |
haṃsauṃ - kaniṣṭhikābhyā-nnamaḥ | haṃsaḥ-karatala karapṛṣṭhābhyā-nnamaḥ | 2
hṛdayādi nyāsaḥ -
haṃsāṃ - hṛdayāya namaḥ | haṃsīṃ - śirase svāhā |
haṃsūṃ - śikhāyai vaṣaṭ | haṃsaiṃ - kavacāya hum |
haṃsauṃ - netratrayāya vauṣaṭ | haṃsaḥ - astrāya phaṭ ||
o-mbhūrbhuva॒ssuva॒romiti digbandhaḥ | 3
dhyānaṃ -
gamāgamastha-ṅgamanādiśūnya-ñci-drūpadīpa-ntimirāpahāram |
paśyāmi te sarvajanāntarastha-nnamāmi haṃsa-mparamātmarūpam || 4

करन्यासः - हंसां अंगूठे से नमः। हंसी तर्जनी से नमः। हंसूं मध्यमा से नमः। हंसैं अनामिका से नमः। हंसौं कनिष्ठिका से नमः। हंसः करतल और करपृष्ठ से नमः। 2 हृदयादि न्यासः - हंसां हृदयाय नमः। हंसीं शिरसे स्वाहा। हंसूं शिखायै वषट्। हंसैं कवचाय हुम्। हंसौं नेत्रत्रयाय वौषट्। हंसः अस्त्राय फट्॥ ओं भूर्भुवः स्वरोमिति दिग्बन्धः। 3 ध्यानं - गमन-आगमन में स्थित, गमन आदि से शून्य, चिद्रूप दीप, अंधकार को हरने वाले। हे सर्वजनों के अंदर स्थित, मैं तुम्हें देखता हूँ, परमात्मरूप हंस को नमस्कार करता हूँ॥ 4 AI

करन्यास: हंसां - अंगठ्याकडून नमः. हंसी - तर्जनीकडून नमः. हंसूं - मध्यमेकडून नमः. हंसैं - अनामिकेकडून नमः. हंसौं - कनिष्ठेकडून नमः. हंसः - करतळ आनी करपृष्ठाकडून नमः. हृदयादि न्यास: हंसां - हृदयाक नमः. हंसी - शिराक स्वाहा. हंसूं - शिखेक वषट्. हंसैं - कवचाक हुम्. हंसौं - तीन नेत्रांक वौषट्. हंसः - अस्त्राक फट्. ओम् भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बंध. ध्यान: गमन-आगमन, स्थिती, गमन इत्यादींपसून शून्य, चिद्रूप दीप, अंधकार दूर करपी. तुजें सर्व जनांच्या अंतरांत आशिल्लें पळयतां, हंस परमात्मरूपाक नमस्कार करतां. AI

Mantra 5
ਦੇਹੋ ਦੇਵਾਲਯਃ ਪ੍ਰੋਕ੍ਤੋ ਜੀਵੋ ਦੇਵ-ਸ੍ਸਨਾਤਨਃ ।
ਤ੍ਯਜੇਦਜ੍ਞਾਨਨਿਰ੍ਮਾਲ੍ਯਂ ਸੋ-ऽਹਮ੍ਭਾਵੇਨ ਪੂਜਯੇਤ੍ ॥
ਹਂ॒ਸ ਹਂ॒ਸਾਯੑ ਵਿ॒ਦ੍ਮਹੇੑ ਪਰਮਹਂ॒ਸਾਯੑ ਧੀਮਹਿ ।
ਤਨ੍ਨੋੑ ਹਂਸਃ ਪ੍ਰਚੋ॒ਦਯਾ᳚ਤ੍ ॥ 5
deho devālayaḥ prokto jīvo deva-ssanātanaḥ |
tyajedajñānanirmālyaṃ so-'hambhāvena pūjayet ||
haṃ॒sa haṃ॒sāya̭ vi॒dmahḙ paramahaṃ॒sāya̭ dhīmahi |
tanno̭ haṃsaḥ praco॒dayā᳚t || 5

देह को देवालय कहा गया है, जीव सनातन देव है। अज्ञानरूपी निर्माल्य को त्याग दे और सोऽहं भाव से पूजा करे॥ हंस हंसाय विद्महे परमहंसाय धीमहि। तन्नो हंसः प्रचोदयात्॥ 5 AI

देह देवालय म्हणटात, जीव सनातन देव. अज्ञानान केल्लो निर्माल्य त्याग करचो, सोऽहम् भावान पूजा करची. हंस हंसाय विद्महे परमहंसाय धीमहि. तन्नो हंसः प्रचोदयात्. AI

(ਇਤਿ ਤ੍ਰਿਵਾਰ-ਞ੍ਜਪਿਤ੍ਵਾ)
Mantra 6
ਹਂਸ ਹਂ॒ਸੇਤਿ ਯੋ ਬ੍ਰੂਯਾ-ਧਂਸੋ (ਬ੍ਰੂਯਾਦ੍ਧਂਸੋ) ਨਾਮ ਸਦਾਸ਼ਿਵਃ ।
ਏਵ-ਨ੍ਨ੍ਯਾਸ ਵਿਧਿ-ਙ੍ਕृਤ੍ਵਾ ਤਤ-ਸ੍ਸਮ੍ਪੁਟਮਾਰਭੇਤ੍ ॥ 6
haṃsa haṃ॒seti yo brūyā-dhaṃso (brūyāddhaṃso) nāma sadāśivaḥ |
eva-nnyāsa vidhi-ṅkṛtvā tata-ssampuṭamārabhet || 6

हंस हंसेति जो बोले, वह हंस नाम सदाशिव है। इस प्रकार न्यास विधि करके, तत्पश्चात संपुट आरंभ करे॥ 6 AI

हंस हंस अशें जो म्हणटा, तो हंस नाम सदाशिव. अशे तरेन न्यास विधी करून, उपरांत सम्पुट सुरू करचो. AI

Sanskrit — Devanagari (original)
अस्य श्री हंसगायत्री महामन्त्रस्य, अव्यक्त परब्रह्म ऋषिः,
अनुष्टु-प्छन्दः, परमहंसो देवता ।
हंसा-म्बीजम्, हंसीं शक्तिः । हंसू-ङ्कीलकम् ।
परमहंस प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ 1
करन्यासः -
हंसां अगुंष्ठाभ्या-न्नमः । हंसी-न्तर्जनीभ्या-न्नमः ।
हंसूं - मद्ध्यमाभ्या-न्नमः । हंसैं - अनामिकाभ्या-न्नमः ।
हंसौं - कनिष्ठिकाभ्या-न्नमः । हंसः-करतल करपृष्ठाभ्या-न्नमः । 2
हृदयादि न्यासः -
हंसां - हृदयाय नमः । हंसीं - शिरसे स्वाहा ।
हंसूं - शिखायै वषट् । हंसैं - कवचाय हुम् ।
हंसौं - नेत्रत्रयाय वौषट् । हंसः - अस्त्राय फट् ॥
ओ-म्भूर्भुव॒स्सुव॒रोमिति दिग्बन्धः । 3
ध्यानं -
गमागमस्थ-ङ्गमनादिशून्य-ञ्चि-द्रूपदीप-न्तिमिरापहारम् ।
पश्यामि ते सर्वजनान्तरस्थ-न्नमामि हंस-म्परमात्मरूपम् ॥ 4
देहो देवालयः प्रोक्तो जीवो देव-स्सनातनः ।
त्यजेदज्ञाननिर्माल्यं सो-ऽहम्भावेन पूजयेत् ॥
हं॒स हं॒साय॑ वि॒द्महे॑ परमहं॒साय॑ धीमहि ।
तन्नो॑ हंसः प्रचो॒दया᳚त् ॥ 5
(इति त्रिवार-ञ्जपित्वा)
हंस हं॒सेति यो ब्रूया-धंसो (ब्रूयाद्धंसो) नाम सदाशिवः ।
एव-न्न्यास विधि-ङ्कृत्वा तत-स्सम्पुटमारभेत् ॥ 6
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Gurmukhi script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
🕉 InfoLyter.in