Angaraka (Mars)

𑌕𑍁𑌜 𑌗𑍍𑌰𑌹 𑌪𑌞𑍍𑌚𑌰𑌤𑍍𑌨 𑌸𑍍𑌤𑍋𑌤𑍍𑌰𑌮𑍍

Kuja Graha Pancharatna Stotram

✍️ Unknown author 📂 Stotram 📂 Panchakam & Pancharatnam 🖋️ Grantha script 🔢 5 verses 20 views
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🖋️ Script: க்ரந்த ▾
⚠️ AI-generated translation — the Hindi meaning was produced by AI and automatically cross-checked against the Sanskrit, but it may still contain errors. It has not yet been reviewed by a scholar. Please refer to a traditional commentary for study.
Summary — Hindi
कुज ग्रह पञ्चरत्न स्तोत्रम् में अंगारक (मंगल) की स्तुति की गई है। इसमें मंगल को पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न, बिजली के समान कांति वाले, कुमार स्वरूप और हाथ में शक्ति धारण करने वाले बताया गया है। उन्हें पृथ्वी का पुत्र, महाभाग्यशाली, मंगलमय, महावीर, महाशूर, महाबल और पराक्रम वाला कहा गया है। भरद्वाज कुल में उत्पन्न, शुभ भूषण वाले और मेरु की प्रदक्षिणा करके सर्वदेवात्मा को सिद्धि देने वाले रूप में उनका वर्णन है। अंत में चार भुजाओं वाले, मेष वाहन पर सवार, वरदान देने वाले, पृथ्वी के प्रिय, रत्नमाला और वस्त्र धारण करने वाले अंगारक को प्रणाम किया गया है।

AI-generated · not yet verified

The Hindi meaning of each verse is shown below the verse.

Meaning —
Verse 1
𑌧𑌰𑌣𑍀𑌗𑌰𑍍𑌭 𑌸𑌮𑍍𑌭𑍂𑌤𑌂 𑌵𑌿𑌦𑍍𑌯𑍁𑌕𑍍𑌯𑌾𑌨𑍍𑌤𑌿𑌸𑌮𑌪𑍍𑌰𑌭𑌮𑍍 ।
𑌕𑍁𑌮𑌾𑌰𑌂 𑌶𑌕𑍍𑌤𑌿 𑌹𑌸𑍍𑌤𑌂 𑌤𑌂 𑌮𑌙𑍍𑌗𑌲𑌂 𑌪𑍍𑌰𑌣𑌮𑌾𑌮𑍍𑌯𑌹𑌮𑍍 ॥ 1 ॥
dharaṇīgarbha sambhūtaṃ vidyukyāntisamaprabham |
kumāraṃ śakti hastaṃ taṃ maṅgalaṃ praṇamāmyaham || 1 ||

पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न, बिजली की चमक के समान कांति वाले, कुमार स्वरूप, हाथ में शक्ति धारण करने वाले उस मंगल को मैं प्रणाम करता हूँ। AI

Verse 2
𑌮𑌹𑍀𑌸𑍁𑌤 𑌮𑌹𑌾𑌭𑌾𑌗𑍋 𑌮𑌙𑍍𑌗𑌲𑍋 𑌮𑌙𑍍𑌗𑌲𑌪𑍍𑌰𑌦𑌃 ।
𑌮𑌹𑌾𑌵𑍀𑌰𑍋 𑌮𑌹𑌾𑌶𑍂𑌰𑍋 𑌮𑌹𑌾𑌬𑌲 𑌪𑌰𑌾𑌕𑍍𑌰𑌮𑌃 ॥ 2 ॥
mahīsuta mahābhāgo maṅgalo maṅgalapradaḥ |
mahāvīro mahāśūro mahābala parākramaḥ || 2 ||

पृथ्वी के पुत्र, महाभाग्यशाली, मंगलमय, मंगल देने वाले, महावीर, महाशूर, महाबल और पराक्रम वाले। AI

Verse 3
𑌭𑌰𑌧𑍍𑌵𑌾𑌜 𑌕𑍁𑌲𑍋𑌦𑍍𑌭𑍂𑌤𑍋 𑌭𑍂𑌸𑍁𑌤𑍋 𑌭𑌵𑍍𑌯 𑌭𑍂𑌷𑌣𑌃 ।
𑌮𑍇𑌰𑍁𑌂 𑌪𑍍𑌰𑌦𑌕𑍍𑌷𑌿𑌣𑌂 𑌕𑍃𑌤𑍍𑌵𑌾 𑌸𑌰𑍍𑌵𑌦𑍇𑌵𑌾𑌤𑍍𑌮 𑌸𑌿𑌦𑍍𑌦𑌿𑌦𑌮𑍍 ॥ 3 ॥
bharadhvāja kulodbhūto bhūsuto bhavya bhūṣaṇaḥ |
meruṃ pradakṣiṇaṃ kṛtvā sarvadevātma siddidam || 3 ||

भरद्वाज कुल में उत्पन्न, भूमि के पुत्र, शुभ भूषण वाले, मेरु की प्रदक्षिणा करके सर्वदेवात्मा को सिद्धि देने वाले। AI

Verse 4
𑌨𑌮𑌸𑍍𑌤𑍇 𑌮𑌹𑌾𑌶𑌕𑍍𑌤𑌿 𑌪𑌾𑌣𑍇 𑌨𑌮𑌸𑍍𑌤𑍇 𑌲𑌸𑌦𑍍𑌵𑌜𑍍𑌰𑌪𑌾𑌣𑍇 ।
𑌨𑌮𑌸𑍍𑌤𑍇 𑌕𑌟𑌿𑌨𑍍𑌯𑌸𑍍𑌤𑌪𑌾𑌣𑍇 𑌨𑌮𑌸𑍍𑌤𑍇 𑌸𑌦𑌾𑌭𑍀𑌷𑍍𑌟𑌪𑌾𑌣𑍇 ॥ 4 ॥
namaste mahāśakti pāṇe namaste lasadvajrapāṇe |
namaste kaṭinyastapāṇe namaste sadābhīṣṭapāṇe || 4 ||

हे महाशक्ति धारण करने वाले, आपको नमस्कार है; हे चमकते वज्र को धारण करने वाले, आपको नमस्कार है। हे कटि पर हाथ रखने वाले, आपको नमस्कार है; हे सदा अभीष्ट देने वाले, आपको नमस्कार है। AI

Verse 5
𑌚𑌤𑍁𑌰𑍍𑌭𑍁𑌜𑌾𑌂 𑌮𑍇𑌷𑌵𑌾𑌹𑌨𑌂 𑌵𑌰𑌦𑌾𑌂 𑌵𑌸𑍁𑌧𑌾𑌪𑍍𑌰𑌿𑌯𑌮𑍍 ।
𑌰𑌤𑍍𑌤𑌮𑌾𑌲𑍍𑌯𑌾𑌮𑍍𑌬𑌰𑌧𑌰𑌂 𑌤𑌂 𑌅𑌙𑍍𑌗𑌾𑌰𑌕𑌂 𑌪𑍍𑌰𑌣𑌮𑌾𑌮𑍍𑌯𑌹𑌮𑍍 ॥ 5 ॥
caturbhujāṃ meṣavāhanaṃ varadāṃ vasudhāpriyam |
rattamālyāmbaradharaṃ taṃ aṅgārakaṃ praṇamāmyaham || 5 ||

चार भुजाओं वाले, मेष वाहन पर सवार, वरदान देने वाले, पृथ्वी के प्रिय, रत्नमाला और वस्त्र धारण करने वाले उस अंगारक को मैं प्रणाम करता हूँ। AI

Sanskrit — Devanagari (original)
धरणीगर्भ सम्भूतं विद्युक्यान्तिसमप्रभम् ।
कुमारं शक्ति हस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥ 1 ॥
महीसुत महाभागो मङ्गलो मङ्गलप्रदः ।
महावीरो महाशूरो महाबल पराक्रमः ॥ 2 ॥
भरध्वाज कुलोद्भूतो भूसुतो भव्य भूषणः ।
मेरुं प्रदक्षिणं कृत्वा सर्वदेवात्म सिद्दिदम् ॥ 3 ॥
नमस्ते महाशक्ति पाणे नमस्ते लसद्वज्रपाणे ।
नमस्ते कटिन्यस्तपाणे नमस्ते सदाभीष्टपाणे ॥ 4 ॥
चतुर्भुजां मेषवाहनं वरदां वसुधाप्रियम् ।
रत्तमाल्याम्बरधरं तं अङ्गारकं प्रणमाम्यहम् ॥ 5 ॥
🕉️ This is the original Sanskrit rendered in Grantha script. Pronunciation is identical to the Sanskrit Devanagari version. It is a transliteration, not a translation — see “Meaning” for translations where available.
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